ठेका पद्धति थोपने के खिलाफ भड़के सफाई कर्मी, बोले– हमारा भविष्य अंधकार में डालने की कोशिश ?
बड़वाह। The India Speaks Desk
बड़वाह नगर पालिका इन दिनों विवादों के घेरे में है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़वाह नगर पालिका अपने ही सफाई कर्मियों पर लगातार अत्याचार करने पर आमादा दिखाई दे रही है।
नगर पालिका ने सफाई कार्यों को ठेके पर देने का निर्णय लेकर न केवल सफाई कामगारों के भविष्य से खिलवाड़ किया है, बल्कि पूरे शहर को भी गंदगी और बीमारी के खतरे में धकेल दिया है।
नगर पालिका पर गंभीर आरोप, “ज्ञापन तक लेने को तैयार नहीं”


अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के नेतृत्व में सफाई कामगारों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने पहुंचे। लेकिन सफाई कर्मियों का आरोप है कि नगर पालिका के सीएमओ और अध्यक्ष ने उनका ज्ञापन लेने तक से इंकार कर दिया।
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“हमारे विरोध के बावजूद ठेका पद्धति लागू कर दी गई है। हमें नजरअंदाज कर नगर पालिका ने हमारी रोज़ी-रोटी पर चोट की है।” — सफाई कामगार
हड़ताल से शहर होगा बेहाल, क्या नगर पालिका करेगी निदान ?
हड़ताल के चलते बड़वाह की गलियों और मोहल्लों में कचरे के ढेर लगने तय है । ऐसी स्थिति में भविष्य में मच्छर, बदबू और गंदगी से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। यह सवाल उठ रहा है कि जब शहर की सेहत दांव पर है तो नगर पालिका आखिर किसके दबाव में ठेका पद्धति थोपने पर अड़ी है?
कामगारों का ऐलान: “मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी”
सफाई कर्मियों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक ठेका पद्धति निरस्त नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। महिलाओं और पुरुषों की भारी भागीदारी ने इस हड़ताल को और मज़बूत बना दिया है।
अब देखना होगा कि क्या बड़वाह नगर पालिका सफाई कामगारों और जनता की आवाज़ सुनेगी या अपनी मनमानी से पूरे शहर को गंदगी और बीमारी के हवाले कर देगी।












