बड़वाह/खरगौन। The India Speaks
इंदौर–इच्छापुर नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य अधूरा है। अभी इस मार्ग को कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक नहीं मिला है और न ही आम वाहनों की आवाजाही को औपचारिक अनुमति है। लेकिन इसके बावजूद असोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड जैसी बड़ी शराब कंपनी इस अधूरे हाइवे को अपने भारी वाहनों के लिए पार्किंग ज़ोन बना चुकी है। रोज़ाना 50 से 60 टन के ट्रक इस मार्ग पर दौड़ रहे हैं और कंपनी के करीब 300 वाहन हाईवे पर खड़े रहते हैं।


स्लोप निर्माण से दुर्घटना का खतरा
इतना ही नहीं, कंपनी ने हाइवे से सटाकर स्लोप भी बना दिया है, जो भविष्य में गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। यह कार्यवाही MoRTH (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) और NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
पहले बंद हुआ हाइवे, फिर बैरिकेड हटे


The India Speaks की खबर के बाद NHAI ने एक बार इस हाइवे को बंद कर बैरिकेड लगा दिए थे। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि केवल दो दिन में ही बैरिकेड हटा दिए गए और शराब कंपनी के वाहनों को फिर से निकलने दिया जाने लगा।
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क्या कहते हैं नियम?
🚫 Control of National Highways (Land and Traffic) Act, 2002
हाईवे पर अतिक्रमण या निजी कब्ज़ा सख्त प्रतिबंधित है।
किसी भी अधूरे या अनुपयुक्त मार्ग पर भारी वाहनों का संचालन अपराध की श्रेणी में आता है।
हाईवे प्रशासन को अधिकार है कि वह ऐसे वाहनों को रोककर कार्रवाई करे और जुर्माना वसूले।
📜 MoRTH की SOP (2025)
हर तीन महीने पर अतिक्रमण की पहचान के लिए निरीक्षण अनिवार्य है।
ड्रोन और एरियल सर्वे से भी कब्ज़े की जांच करनी होती है।
जिला प्रशासन और पुलिस को मिलकर अतिक्रमण हटाना और जुर्माना लगाना ज़रूरी है।
सवालों के घेरे में NHAI और प्रशासन
स्पष्ट है कि अधूरे हाईवे पर शराब कंपनी का इस तरह कब्ज़ा केंद्र सरकार के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना है। अब बड़ा सवाल यह है कि —
आखिर क्यों NHAI और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में चुप है?
क्या उद्योगपति के रसूख के आगे नियम और सुरक्षा दरकिनार की जा रही है?
इस पूरे मामले पर The India Speaks लगातार नज़र बनाए हुए है। प्रशासन की निष्क्रियता और कंपनी की मनमानी को लेकर जल्द ही और बड़े खुलासे सामने लाए जाएंगे।












