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महामंडलेश्वर स्वामी नर्मदानंद बोले – ओंकारेश्वर से विश्व में हो रहा एकात्मता का प्रसार

स्वामी भूमानंद सरस्वती ने कहा – भेदभाव का समाधान अद्वैत वेदांत में

ओंकारेश्वर। प्रीति शर्मा | The India Speaks

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ओंकारेश्वर की पावन भूमि पर स्थित ‘एकात्म धाम’ में रविवार को आचार्य शंकर की 108 फीट ऊँची बहुधातु निर्मित प्रतिमा ‘एकात्मता की प्रतिमा’ की स्थापना की द्वितीय वर्षगांठ पर भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर आचार्य शंकर के विरचित स्तोत्रों और भाष्यों का पारायण किया गया। साथ ही रुद्राभिषेक और संवाद कार्यक्रम भी संपन्न हुआ।

एकात्मता का संदेश: स्वामी नर्मदानंद

महामंडलेश्वर स्वामी नर्मदानंद बापजी ने कहा कि जगत के कल्याण के लिए आचार्य शंकराचार्य का अवतार हुआ। ओंकारेश्वर की पुण्य भूमि का सौभाग्य है कि आचार्य गुरु की खोज में यहाँ आए। उन्होंने कहा कि आज एकात्म धाम के माध्यम से विश्व में एकात्मता का संदेश यहीं से जन-जन तक पहुँच रहा है।

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उन्होंने आगे कहा –
“भगवत्पाद भाष्यकार भगवान आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य ने अद्वैत एवं एकात्मता का उद्घोष करते हुए उपनिषद, गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य रचे तथा चार मठों की स्थापना से भारत को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बाँधा। पूरे विश्व को शांति, समाधान और एकात्मकता प्रदान करने की सामर्थ्य अद्वैत दर्शन में निहित है।”

अद्वैत ही जीवन दृष्टि है: स्वामी भूमानंद सरस्वती

स्वामी भूमानंद सरस्वती ने कहा कि अद्वैत कोई सिद्धांत मात्र नहीं बल्कि जीवन दृष्टि है। आज पुनः ओंकार की तपोभूमि से अद्वैत की सर्वत्र अनुगूँज सुनाई दे रही है। उन्होंने कहा –
“समस्त समस्याओं की जड़ भेदभाव है और उसका समाधान अद्वैत वेदांत में निहित है।”

शंकराचार्य केवल ज्ञानी ही नहीं, भक्त भी थे

ब्रह्मचारी रमण चैतन्य ने कहा कि आचार्य शंकर केवल ज्ञानी ही नहीं, परम भक्त भी थे। उन्होंने जगन्नाथ अष्टकम्, नर्मदा स्तोत्र, गंगा स्तोत्र जैसे भक्ति स्तोत्रों की रचना कर उपासना और भक्ति की धारा को जीवंत रखा।

स्तोत्रों से गूँजा ओंकार पर्वत

कार्यक्रम के दौरान शंकर दूतों ने तोटकाष्टकम्, नर्मदा अष्टक, गंगा स्तोत्र जैसे स्तोत्रों का सामूहिक गायन किया। ‘‘विदिताखिल शास्त्र सुधा जलधे, महितोपनिषत्-कथितार्थ निधे, हृदये कलये विमलं चरणं, भव शंकर देशिक मे शरणम्’’ मंत्रोच्चारण से वातावरण और भी भक्ति-पूर्ण और दिव्य बना।

अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण जारी

एकात्म धाम के अंतर्गत प्रथम चरण में 108 फीट की ‘एकात्मता की प्रतिमा’ स्थापित की गई है। वहीं द्वितीय चरण में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में आचार्य शंकर के जीवन और दर्शन पर केंद्रित अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण 2,195 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।

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