माउंट आबू (राजस्थान) | राजेंद्र करनाल की रिपोर्ट
माउंट आबू में ब्रह्माकुमारीज़ के मीडिया विंग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस में देश भर से आए पत्रकारों ने एक अनूठे सत्र में अपने हृदयस्पर्शी अनुभव साझा किए। करीब डेढ़ हज़ार पत्रकारों ने एक स्वर में यह स्वीकार किया कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान ने उन्हें केवल ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि उस ज्ञान को जीवन में व्यवहार में लाना भी सिखाया।
कॉन्फ्रेंस में शांति, एकता और विश्वास को समाज का स्थायी भाव बनाने पर गहन चर्चा हुई।
वक्ताओं के मुख्य अंश
“स्वर्ग देखना है तो ब्रह्माकुमारीज़ आकर देखो” – कनुभाई आचार्य
डिसा से आए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त वरिष्ठ स्तंभकार कनुभाई आचार्य ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संस्था ने उन्हें ‘पत्रकार मनीषी’ कहकर सम्मानित किया, जो उन्हें ज्ञान का प्रयोग करने का संकेत देता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “जब मैं पहली बार यहाँ आया तो मेरे मन में आया स्वर्ग यहीं है। सतयुग का स्वर्ग देखना है तो ब्रह्माकुमारीज़ आकर देखो।”
“नेपाल में लोगों ने ब्रह्माकुमारीज़ सेंटर पर शरण ली” – सुरेंद्र सिंह डोंगरा
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हिमालिनी पत्रिका के दिल्ली ब्यूरो चीफ (नेपाल निवासी) सुरेंद्र सिंह डोंगरा ने बताया कि वह दो दशकों से अधिक समय से इस संस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नेपाल की एक घटना का ज़िक्र करते हुए कहा, “जब पूरी दुनिया की नज़र नेपाल में थी, तब पोखरा में ब्रह्माकुमारीज़ के सेंटर में कई लोगों ने शरण ली। यह दर्शाता है कि संस्था का शांति का संदेश कितना गहरा है।”
“जीवन में बैलेंस सीखना हो तो ब्रह्माकुमारीज़ आइये” – विशाल यादव
रायपुर से आए ‘जनमंत्र न्यूज़’ के संपादक विशाल यादव ने पत्रकारों के तनावपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, “पत्रकारों पर बहुत प्रेशर होता है, वे बहुत जल्द रिएक्ट करते हैं। लेकिन यहाँ आकर और ब्रह्माकुमारी बहनों की त्याग तपस्या देखकर सकारात्मक परिवर्तन महसूस होते हैं। जीवन में बैलेंस सीखना हो तो यहाँ आइये।”
43 वर्षों से जारी है कॉन्फ्रेंस: बीके शशिकांत भाई
डिसा से आए वरिष्ठ पत्रकार बीके शशिकांत भाई ने बताया कि ब्रह्माकुमारीज़ का मीडिया विंग 1983 से यानी 43 वर्षों से लगातार मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में सकारात्मकता लाना है और अब तक हज़ारों पत्रकारों ने यहाँ आकर मेडिटेशन को जीवन में उतारा है।
“पत्रकार सत्य को सामने रखते हैं” – गणेशदत्त जोशी
मीडिया विंग के एडिशनल जोनल कोऑर्डिनेटर गणेशदत्त जोशी ने पत्रकारों को ‘नेक्स्ट टू गॉड’ बताते हुए कहा, “पत्रकार अपनी लेखनी द्वारा समाज को प्रभावित और प्रकाशित करते हैं, क्योंकि वो सत्य को सामने रखते हैं।” उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का भी ज़िक्र किया, जिन्होंने ज्ञान सरोवर आकर भारत की आध्यात्मिक शक्ति को समझा था।
“देरी से आने का पछतावा है” – प्रेम कुमार
बिहार श्रमजीवी पत्रकार संघ के महासचिव प्रेम कुमार ने भावुकता से कहा, “हम हर बार निमंत्रण मिलने पर सोचते थे कि ऐसे सम्मेलन होते रहते हैं, लेकिन अब आकर पछता रहा हूँ कि मैं इतना लेट क्यों आया। मुझे तो पहले आना चाहिए था।” उन्होंने पत्रकारों से सत्य का साथ देने का आह्वान किया।
समापन और शुभकामनाएं
सत्र की अध्यक्षता कर रहीं मीडिया विंग की उपाध्यक्ष बीके सरला दीदी ने सभी पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “मीडिया में कार्य बहुत तनावपूर्ण होता है, आपको भगवान की एक्स्ट्रा मदद चाहिए।” उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी पत्रकार यहाँ से शांति के प्रतिरूप होकर निकलेंगे और दुनिया में बदलाव लाने में मदद करेंगे।
सत्र का संचालन अजमेर से आईं मीडिया विंग की सब जोनल कोऑर्डिनेटर बीके योगिनी दीदी ने किया। इस दौरान कई पत्रकारों ने खुले सत्र में प्रश्न पूछकर राजयोग मेडिटेशन संबंधी अपनी जिज्ञासाओं को भी शांत किया।












