नई दिल्ली/चंडीगढ़: चुनाव आयोग (Election Commission of India – ECI) ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पंजाब की 12 राजनीतिक पार्टियों की मान्यता रद्द (Delist) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन दलों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद इन गैर-मान्यता प्राप्त दलों (RUPPs) पर अपनी पहचान खोने का खतरा मंडरा रहा है।
मान्यता रद्द करने का मुख्य आधार
चुनाव आयोग के अनुसार, इन पार्टियों पर कार्रवाई का मुख्य कारण वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन है:
- वार्षिक खातों में चूक: इन दलों ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने वार्षिक ऑडिटेड खाते (Annual Audited Accounts) चुनाव आयोग के पास जमा नहीं किए हैं।
- चुनाव खर्च का विवरण न देना: पार्टियों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे विधानसभा या लोकसभा चुनावों के बाद अपने चुनाव खर्च का विस्तृत विवरण आयोग को सौंपें, जिसका पालन इन दलों ने नहीं किया।
ECI का कहना है कि ये दल चुनाव कानून की धारा 29C के तहत अनिवार्य वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं।
आगे की कार्रवाई
पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने नोटिस जारी करते हुए इन पार्टियों को अपना पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया है।
- सुनवाई की तिथि: सभी 12 पार्टियों के प्रमुखों को 17 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:00 बजे सुनवाई के लिए बुलाया गया है।
- कानूनी शक्ति: चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A में निहित अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इन पार्टियों की मान्यता रद्द करने (Delist) का प्रस्ताव दिया है।
व्यापक अभियान का हिस्सा
यह कार्रवाई चुनाव प्रणाली की शुद्धि के लिए चलाए जा रहे देशव्यापी अभियान का हिस्सा है। आयोग लगातार उन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों की पहचान कर रहा है जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं, चुनाव नहीं लड़ती हैं, या केवल कर छूट (Tax Exemption) जैसे लाभ लेने के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन कानूनी अनिवार्यताओं का पालन नहीं करती हैं।
यदि ये पार्टियाँ 17 अक्टूबर की सुनवाई में संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती हैं, तो इन्हें पंजीकृत राजनीतिक दलों की सूची से हटा दिया जाएगा।
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