बड़वाह | The India Speaks
सिक्खों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास साहेब जी के प्रकाश पर्व का आयोजन दूसरे दिन भी पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हुआ। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। संगत ने कीर्तन, व्याख्यान और सेवा के माध्यम से गुरु साहिब के उपदेशों को आत्मसात किया।
भाई बुध सिंह जी के जत्थे ने किया भावपूर्ण कीर्तन
आयोजन की शुरुआत स्थानीय भाई साहेब भाई बुध सिंह जी के जत्थे द्वारा कीर्तन से हुई, जिसने संगत को निहाल कर दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु के चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अमृतसर से आए जत्थे ने किया गुरु साहिब के जीवन का व्याख्यान
इसके उपरांत श्री दरबार साहेब अमृतसर से पधारे भाई साहेब भाई राय सिंह जी के जत्थे ने कीर्तन व्याख्यान के माध्यम से श्री गुरु रामदास साहेब जी के जीवन वृतांत, त्याग और सेवाभाव के बारे में विस्तार से बताया। संगत ने अत्यंत श्रद्धा और ध्यानपूर्वक गुरु साहिब के जीवन से प्रेरणा ली।
गुरु साहिब का जीवन स्वयं में प्रेरणा का स्रोत
समिति के अध्यक्ष सरदार रविंदर सिंह ने बताया कि श्री गुरु रामदास साहेब जी (जेठा जी) का जन्म चूना मंडी, लाहौर (अब पाकिस्तान में) हुआ था। उनके पिता बाबा हरि दास जी सोढ़ी खत्री और माता माता दया कौर जी थीं।
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गुरु साहिब का जीवन संघर्ष और सेवा का उदाहरण है —
बचपन में माता-पिता का देहांत हो जाने के बाद उन्होंने उबले चने बेचकर अपनी आजीविका चलाई। उनकी नानी उन्हें बासरके गाँव ले गईं जहाँ उन्होंने पाँच वर्ष तक जीवनयापन किया। बाद में वे गोइंदवाल साहिब आए, जहाँ उन्होंने सेवा और सत्संग के माध्यम से अपना जीवन समर्पित किया।
समिति ने जत्थे व संगत का किया सम्मान
कार्यक्रम के अंत में समिति के सचिव द्वय सरदार मनप्रीत सिंह एवं सरदार सतविंदर सिंह भाटिया ने सभी जत्थों, संगत और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को एकता, प्रेम और सेवा की प्रेरणा देते हैं।”
आयोजन में सरदार अवतार सिंह, सरदार जसपाल सिंह, सरदार इकबाल सिंह, सरदार गुरुचरण सिंह, सरदार भूपेंदर सिंह, सरदार प्रदुमन सिंह आदि ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
उक्त जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी सरदार परविंदर सिंह ने दी।












