गोवा पहुँचा अवैध माल, लेकिन अधिकारी ने जाली परमिट पकड़कर किया भंडाफोड़; खरगोन आबकारी के पास ‘EVC’ तक नहीं— CBI/ED जाँच की मांग तेज
बड़वाह/गोवा। (द इंडिया स्पीक्स एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन)
मध्य प्रदेश के बड़वाह स्थित नामी शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड (केडिया ग्रुप) पर अवैध शराब तस्करी का मामला अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है। कंपनी के पूर्व कर्मचारी सत्यनारायण शर्मा ने न सिर्फ करोड़ों के राजस्व चोरी का आरोप लगाया है, बल्कि यह भी खुलासा किया है कि इस तस्करी में उपयोग किए गए आयात (Import) परमिट जाली (Fake) थे, जिसकी पुष्टि गोवा के संबंधित आबकारी अधिकारी ने माल उतारे जाने के समय ही की थी।
जान जोखिम में डालकर बचाए गए जाली परमिट के सबूत
श्री सत्यनारायण शर्मा ने ‘द इंडिया स्पीक्स’ के साथ साझा किया कि कंपनी के लोगों ने ये मूल परमिट उनसे छीन लिए थे, लेकिन उन्होंने जान जोखिम में डालकर इनकी फोटोकॉपी (छायाप्रति) सुरक्षित रखी। ये दस्तावेज़ ही इस अंतर-राज्यीय तस्करी के प्रमाण हैं।
दस्तावेजों के आधार पर तीन निर्णायक खुलासे:
1. जाली परमिटों पर गोवा पहुँची अवैध खेप
श्री शर्मा द्वारा साझा किए गए दस्तावेज़ फॉर्म आर.एस. 3 की छायाप्रतियाँ हैं, जो बड़वाह आसवनी से गोवा की जॉन डिस्टिलरीज को रेक्टीफाइड स्पिरिट भेजे जाने से संबंधित हैं।
- परमिट क्रमांक व दिनांक: परमिट क्रमांक 60/GOA/2001-02 और 61/GOA/2001-02 दिनांक 13 जुलाई 2001 को जारी किए गए थे।
- तस्करी का तरीका: माल को मध्य प्रदेश से गोवा तक जाली परमिटों के दम पर पहुँचाया गया था।
- भंडाफोड़: गोवा के वेयरहाउस में माल उतारने के दौरान जब परमिट सत्यापन के लिए गोवा आबकारी अधिकारी के पास पहुँचे, तो उन्होंने तुरंत इन्हें जाली (Fake) घोषित कर दिया और इसकी जानकारी मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त को भी भेजी।
2. खरगोन आबकारी के पास ‘EVC’ (सत्यापन प्रमाण पत्र) नहीं
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श्री शर्मा के अनुसार, सबसे बड़ा खुलासा यह है कि आबकारी विभाग, खरगोन (जिसके तहत बड़वाह आता है) के पास इन परमिटों का एक्साइज़ वेरिफिकेशन सर्टिफ़िकेट (EVC) उपलब्ध नहीं है।
- EVC का महत्व: EVC वह कानूनी प्रमाण होता है जो गंतव्य राज्य (गोवा) यह सत्यापित करने के बाद भेजता है कि माल कानूनी रूप से वेयरहाउस में प्राप्त हो गया है।
- अवैध बिक्री का संदेह: EVC न होने का मतलब है कि जाली परमिट पकड़े जाने के बाद, इस माल को गोवा में कानूनी रूप से वेयरहाउस में दर्ज नहीं किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच से बचने के लिए माल को वहीं से अवैध बाज़ार में बेच दिया गया था।
3. गोवा सीआईडी जांच को ‘मैनेज’ करने का आरोप
गोवा के अधिकारी द्वारा जालसाजी पकड़े जाने के बाद, गोवा सीआईडी पुलिस द्वारा इस मामले में जांच शुरू की गई थी, लेकिन आरोप है कि कंपनी और शराब माफिया के प्रभाव के चलते इस जांच को ‘मैनेज’ करके दबा दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
CBI/ED जाँच की मांग तेज
यह गंभीर मामला जालसाजी, धोखाधड़ी और अंतर-राज्यीय तस्करी का है, जिसमें कंपनी के साथ आबकारी विभाग के अधिकारियों की खुली मिलीभगत है। द इंडिया स्पीक्स मांग करता है कि मध्य प्रदेश और गोवा में फैले इस भ्रष्टाचार महाकांड की जांच तत्काल प्रभाव से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपी जाए।












