6 लाख व्यूज के बाद बड़ा खुलासा! ₹3000 के खली कट्टे के मुकाबले ₹7 किलो मिल रही ‘जहरीली भूसी’, पशुपालक बोले: “जानते हैं, पर खिलाना मजबूरी है!”
बड़वाह/खरगोन/ शुक्रवार 31 अक्टूबर 2025 द इंडिया स्पीक्स डेस्क
बड़वाह स्थित मेसर्स एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरेज लिमिटेड कंपनी द्वारा अवैध रूप से उत्पादित DWGS (Distiller’s Wet Grain Solids) नामक जहरीली गीली भूसी का मामला अब प्रदूषण से बढ़कर लाखों पशुपालकों की आर्थिक मजबूरी का मुद्दा बन गया है।
सोशल मीडिया पर दर्द का सैलाब:
‘द इंडिया स्पीक्स’ द्वारा इस जहरीले DWGS के खतरे को उजागर करने वाले एक वीडियो पर सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पर, जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इस वीडियो को 6 लाख से अधिक बार देखा गया है, जिस पर सैंकड़ों पशुपालकों ने अपनी दयनीय स्थिति व्यक्त की है।
पशुपालकों की प्रतिक्रियाओं से यह बात सामने आई है कि यह भूसी उनके पशुओं और दूध दोनों के लिए हानिकारक है, लेकिन आर्थिक दबाव के कारण वे इसे खिलाने को मजबूर हैं।
कीमत का बड़ा अंतर—जहरीली मजबूरी का कारण:


बाजार में पशुओं के लिए पौष्टिक आहार और प्रोटीन का मुख्य स्रोत खली (Oilseed Cake) अत्यधिक महंगी हो गई है।
- बाजार में 70 किलो खली का एक कट्टा खरीदने के लिए पशुपालकों को लगभग ₹3000 खर्च करने पड़ते हैं।
- इसके विपरीत, कंपनी द्वारा अवैध रूप से उत्पादित DWGS (गीली भूसी) पशुपालकों को मात्र ₹7 से ₹8 प्रति किलोग्राम के सस्ते दाम पर मिल जाती है।
यह भारी मूल्य अंतर छोटे और मध्यम वर्ग के पशुपालकों को इस जहरीले विकल्प की ओर धकेल रहा है।
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पशुपालकों का दर्द: प्रतिक्रियाओं में कई पशुपालकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा कि, “हमारा बजट खली खरीदने की इज़ाजत नहीं देता। हम जानते हैं कि यह भूसी हमारे पशुओं को बीमार कर रही है, लेकिन इतनी मंहगाई में मजबूरी में हमें यह सस्ती DWGS खिलानी पड़ रही है।“
स्वास्थ्य और दूध पर खतरा:
इस जहरीली DWGS के कारण मवेशियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और उनका दूध भी दूषित हो रहा है। विशेषज्ञ इसे मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर खतरा बता रहे हैं, क्योंकि यह दूषित दूध अंततः आम लोगों द्वारा उपभोग किया जाता है।
प्रशासन से अपील:
‘द इंडिया स्पीक्स’ प्रशासन और संबंधित विभागों से अपील करता है कि वे न सिर्फ इस अवैध और जहरीले उत्पादन पर तुरंत रोक लगाएं, बल्कि पशुपालकों की आर्थिक मदद के लिए पौष्टिक खली या अन्य पशु आहार की कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में भी कदम उठाएं, ताकि उन्हें मजबूरी में यह जहरीला चारा न खिलाना पड़े।












