बड़वाह की एसोसिएटेड अल्कोहल कंपनी का DWGS प्लांट नियम विरुद्ध चालू, अधिकारी बोले ‘थोड़ा समय दीजिए’, लेकिन कार्रवाई अब तक शून्य
इंदौर। The India Speaks Desk
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर द्वारा 30 अक्टूबर 2025 को की गई औचक कार्रवाई ने बड़ा खुलासा किया —
ग्राम खोड़ी, तहसील बड़वाह (जिला खरगोन) स्थित एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड का DWGS प्लांट निरीक्षण के समय चालू पाया गया।
यह वही कंपनी है जो पूर्व में भी The India Speaks की रिपोर्टों में जहरीली भूसी (DWGS) को पशु आहार के रूप में बेचने के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रही थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि — औचक निरीक्षण के 10 दिन बीत जाने के बाद भी कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
औचक निरीक्षण की विश्वसनीयता पर उठे सवाल


सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण से दो दिन पहले से ही कंपनी के भीतर प्लांट धोने और सफाई की प्रक्रिया चल रही थी, जिससे यह शक गहराता है कि कंपनी को पहले से निरीक्षण की सूचना मिल गई थी।
जब The India Speaks ने इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्री सतीश चौकसे से सवाल किया, तो उन्होंने कहा —
“निरीक्षण पूरी तरह से औचक था, किसी को इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। प्लांट चालू पाया गया था। थोड़ा समय दीजिए, हम कार्रवाई करेंगे।”
हालांकि The India Speaks ने जब निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति मांगी, तो श्री चौकसे ने देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे मामले की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
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जब प्लांट चालू मिला तो सील क्यों नहीं किया गया?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है —
जब निरीक्षण के दौरान स्पष्ट रूप से DWGS यूनिट चालू पाई गई, तो कंपनी को तत्काल सील क्यों नहीं किया गया?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानक प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई औद्योगिक इकाई ZLD (Zero Liquid Discharge) नियमों का उल्लंघन करते हुए पाई जाती है,
तो उसके खिलाफ तत्काल सीलिंग, सस्पेंशन या दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।
लेकिन इस मामले में, बोर्ड की ओर से 10 दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है, न ही कंपनी पर कार्रवाई की कोई जानकारी दी गई है।
The India Speaks ने सितम्बर 2025 में अपनी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में खुलासा किया था —
“बड़वाह में शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल कर रही है जहरीली भूसी से मौत का कारोबार।”
उस रिपोर्ट के बाद SDM बड़वाह ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई तब भी नहीं हो सकी।
अब औचक निरीक्षण में वही प्लांट फिर चालू मिलना यह दर्शाता है कि कंपनी लगातार नियमों की अवहेलना कर रही है और प्रशासनिक तंत्र की पकड़ कमजोर है।
वही स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह ‘औचक निरीक्षण नहीं, बल्कि औपचारिक दिखावा’ था।
क्योंकि यदि वाकई में निरीक्षण औचक होता और प्लांट चालू मिलता, तो सीलिंग और नोटिस तुरंत जारी होते।
अब तक की स्थिति यह दिखाती है कि बोर्ड केवल “प्रक्रिया में है” के बहाने से टालमटोल कर रहा है।
The India Speaks के सवाल
अब जब बोर्ड स्वयं यह स्वीकार कर चुका है कि प्लांट चालू पाया गया, तो —
क्या यह औद्योगिक अपराध नहीं है?
क्या पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने पर दंड नहीं होना चाहिए?
और यदि कार्रवाई नहीं होती, तो क्या यह नियामक तंत्र की विफलता नहीं मानी जाएगी?
पर्यावरण विशेषज्ञों का मत है कि इस मामले में कंपनी की गतिविधियों की तुरंत स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
साथ ही DWGS के सैंपल की केमिकल एनालिसिस रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता को सच्चाई पता चल सके।
यह मामला अब पर्यावरण, स्वास्थ्य और प्रशासन — तीनों की विश्वसनीयता का इम्तिहान बन चुका है।
संपादक लोकेश कोचले की रिपोर्ट












