माउली विक्रम महाराज बोले — “मां के कंधों से बढ़कर छाती नहीं, धर्म से बढ़कर जाति नहीं”
बड़वाह। The India Speaks Desk
सकल नामदेव समाज बड़वाह द्वारा भक्त शिरोमणि संत नामदेव जी महाराज का 755वां प्राकट्य महोत्सव एवं अन्नकूट समारोह शुक्रवार सायंकाल गुरु गोविंद सराय में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर समाज के सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए और पूरे कार्यक्रम में भक्ति, आध्यात्मिकता और एकता का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में महाराष्ट्र से पधारे प्रसिद्ध कथाकार माउली विक्रम महाराज ने समाज को संबोधित करते हुए कहा —
“मां के कंधों से बढ़कर छाती नहीं है, धर्म से बढ़कर जाति नहीं है।
दीपक ही नहीं तो बाती का क्या करोगे, सनातन धर्म ही नहीं तो जाति का क्या करोगे।
भगवान में नाम है, और नाम में ही देव है। यही हमारे आराध्य भगवान नामदेव जी हैं।”
उन्होंने कहा कि नामदेव जी महाराज के जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण भावना है, जिसे आज हर व्यक्ति को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
“गुणों से भरपूर रह सर्व को दाता बन देते चले” — ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी
ब्रह्माकुमारी केंद्र बड़वाह से पधारी वीणा दीदी और अनिता दीदी ने कहा कि मनुष्य को अपने भौतिक आवरण से ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना के बोध में कर्म करना चाहिए।
उन्होंने कहा —
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“स्वयं को स्नेह, प्रेम, आनंद और खुशी जैसे गुणों से भरपूर रखें, ताकि जीवन में दूसरों को दान और सद्भाव का संचार हो।”
कार्यक्रम में गुरुद्वारा साहिब से पधारे ज्ञानीजी और ग्रंथिजी ने संत नामदेव जी महाराज द्वारा रचित अभंगों को प्रस्तुत किया।
शब्द-कीर्तन के माध्यम से उन्होंने संत नामदेव जी की भक्ति भावना, जीवन शैली और समाज सेवा के आदर्शों का सुंदर चित्रण किया।
संपूर्ण सभा भक्तिरस में सराबोर रही।
अतिथियों का सम्मान और सामूहिक आरती
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत मनीष मण्डवाल, सुनील नामदेव, रितेश मण्डवाल, विक्की पवार, शैलेन्द्र चौहान, योगेश सर्वा, सत्यम नामदेव, गोविंद नामदेव, दिलीप मण्डवाल, गणेश विद्यार्थी और संजय चौहान सहित समाजजनों ने किया।
कार्यक्रम का संचालन नितिन चौहान ने किया जबकि आभार प्रदर्शन मनीष मण्डवाल ने व्यक्त किया।
समाजजनों द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
इसके पश्चात सामूहिक आरती और भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ जिसमें समाज की महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह आयोजन बड़वाह की सकल नामदेव समाज का द्वितीय सामूहिक प्राकट्य उत्सव था।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि समाज एकजुट होकर धर्म, भक्ति और सद्भावना के मार्ग पर चले, तो जीवन भी संत नामदेव जी महाराज के समान दिव्य और अलौकिक बन सकता है।












