सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
खरगोन/आशापुर। The India Speaks Desk
ग्राम पंचायत आशापुर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती शनिवार, 15 नवम्बर 2025 को बड़े उत्साह और परंपरागत सम्मान के साथ मनाई गई। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, युवा वर्ग, जनप्रतिनिधि व बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, उनके आदर्शों और उनके “जल–जंगल–जमीन” आंदोलन की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने समाज से जुड़े अनेक विषयों पर अपने विचार साझा किए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को समाज की उन्नति की नींव बताते हुए वक्ताओं ने युवाओं को इन क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
स्किल डेवलपमेंट और स्व–रोज़गार को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा गया कि—
“आज के समय में युवाओं को केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहते हुए अपने कौशल के आधार पर व्यवसाय और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”
युवाओं को दुकान, गैराज, सर्विस सेंटर, उद्यम एवं विभिन्न स्वरोज़गार गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनने की प्रेरणा दी गई।
साथ ही शराबबंदी, दहेज प्रथा और अन्य सामाजिक चुनौतियों पर भी चिंतन किया गया और इनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया गया।
सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता पर विचार
कार्यक्रम में कुछ वक्ताओं ने समाज की सांस्कृतिक परंपराओं पर भी चर्चा की।
गैर–आदिवासी विवाह जैसे मुद्दों पर भी व्यक्तिगत राय व्यक्त की गई, जिसे उपस्थित समुदाय के बीच चर्चा का विषय माना गया।
आयोजन में क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक प्रतिनिधि व संगठन प्रमुख उपस्थित रहे। इनमें शामिल हैं—
जयस तहसील अध्यक्ष जीतेंद्र बारिया, एकलव्य आदिवासी भील सेवा समिति महेश्वर तहसील अध्यक्ष कालूराम वर्मा (पटवारी), भारत आदिवासी पार्टी (BAP) जिला उपाध्यक्ष भीमसिंह वर्मा, जयस जिला सचिव (खरगोन) गोपाल ओसारी, चंद्रप्रकाश बुंदेला, जयस कार्यकारी अध्यक्ष दारासिंह भांवरें (LIC), जिला पंचायत सदस्य नानूराम भूरिया, रामरतन कटारे, विक्रम गिरवाल, धर्मपूर्वी आशीष भाभर, शमशेर पटेल, लखन बारिया, हरिप्रसाद बुंदेला, महेश बुंदेला, जयंत वर्मा, सुमित (फोटोग्राफर), गोविंद भूरिया, बबलू ओसारी, सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक।
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कार्यक्रम के समापन पर सभी वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन–मूल्य, संघर्ष और उनके सामाजिक संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प दोहराया तथा समाज में शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।












