नवाचार, शोध और आत्मनिर्भरता से समाज को नई दिशा देने वाले करनाल के शोधकर्ता
करनाल (हरियाणा)। वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कैम | The India Speaks
करनाल (हरियाणा) निवासी डॉ. रीतेश सिन्हा एक ऐसे शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और लेखक हैं, जिन्होंने अपने जीवन और कार्यों से यह सिद्ध कर दिया है कि सीमाएँ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती हैं। सेरेब्रल पाल्सी (CP) के साथ जन्मे डॉ. सिन्हा ने समाज में CP का अर्थ बदल दिया है। उनके लिए CP का मतलब Cerebral Palsy नहीं, बल्कि Capable Person है।
डॉ. सिन्हा का मानना है कि यदि सही अवसर, संसाधन और सकारात्मक सोच उपलब्ध कराई जाए, तो सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त व्यक्ति भी हर वह कार्य कर सकता है, जो सामान्य व्यक्ति कर सकता है।
फुट-ऑपरेटेड ट्राइसाइकिल: आत्मनिर्भरता की नई राह
डॉ. रीतेश सिन्हा के शुरुआती नवाचारों में फुट-ऑपरेटेड ट्राइसाइकिल एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आमतौर पर दिव्यांगजनों के लिए बनी साइकिलें हाथों से संचालित होती हैं, लेकिन उन्होंने ऐसी ट्राइसाइकिल विकसित की जिसे पैरों से चलाया जा सकता है। यह नवाचार न केवल स्वतंत्र गतिशीलता देता है, बल्कि आत्मसम्मान और गरिमा का भी प्रतीक बनकर उभरा है।
चिकित्सकीय विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. सिन्हा ने रीतेश मुद्रा का विकास किया, जो प्राचीन भारतीय हस्तमुद्राओं, आधुनिक एक्यूप्रेशर और न्यूरोसाइंस का अनूठा संयोजन है। उनके शोध के अनुसार, इस मुद्रा से—
स्पास्टिसिटी में कमी
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चाल (Gait) में सुधार
लार टपकने (Drooling) पर नियंत्रण
मूत्राशय पर स्वैच्छिक नियंत्रण में सुधार
जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस विषय पर उनका तुलनात्मक अध्ययन ‘शोधकोश’ (यूजीसी-सूचीबद्ध पत्रिका) में प्रकाशित हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय शोध मंचों पर इसे सराहा गया है।
रीतेश मुद्रा के आधार पर डॉ. सिन्हा ने रीतेश इफ़ेक्ट की संकल्पना प्रस्तुत की, जिसमें Small Heavenly Circuit (दाओ पद्धति), सकारात्मक कथन और ध्यान को जोड़ा गया है। इसी क्रम में उन्होंने रीतेश मेडिटेशन तकनीक विकसित की, जिसमें पिरामिड की कल्पना के माध्यम से साधक को मानसिक संतुलन, सुरक्षा और गहन ध्यान की अनुभूति होती है।
पेंसिल पकड़ने की विधि: बच्चों के लिए विशेष नवाचार
सूक्ष्म मोटर कौशल को बेहतर बनाने के लिए डॉ. सिन्हा ने पेंसिल पकड़ने की विशेष विधि विकसित की है। यह तकनीक रीतेश मुद्रा, एक्यूप्रेशर और न्यूरो-मोटर समन्वय पर आधारित है। इससे—
पकड़ (Grip) मजबूत होती है
लिखावट में सुधार आता है
एकाग्रता बढ़ती है
यह विधि विशेष रूप से बच्चों, सेरेब्रल पाल्सी और ADHD से प्रभावित व्यक्तियों के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा रही है।
डॉ. सिन्हा Accessible Clothing (सुगम्य वस्त्र) के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं। उनके डिज़ाइन में वेल्क्रो, इलास्टिक और मैग्नेटिक बटन का उपयोग किया जाता है, जिससे सीमित गतिशीलता वाले लोग बिना किसी सहायता के स्वयं कपड़े पहन सकें और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
नवाचार और शोध के साथ-साथ डॉ. रीतेश सिन्हा दो पुस्तकों के लेखक भी हैं, जिनमें भारतीय परंपराओं का वैज्ञानिक विश्लेषण, समग्र चिकित्सा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण पर गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। उनकी जीवन यात्रा और उपलब्धियाँ ‘सशक्त दिव्यांग’ पुस्तक में भी प्रकाशित हैं, जिसमें 71 प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की कहानियाँ शामिल हैं। इस सूची में स्टीफ़न हॉकिंग और रविन्द्र जैन जैसे विश्वविख्यात नाम भी शामिल हैं।
समाज को संदेश
डॉ. रीतेश सिन्हा आज नवाचार, चिकित्सा और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के अग्रदूत बने हुए हैं। उनका स्पष्ट संदेश है—
“CP का वास्तविक अर्थ है Capable Person।”
सही समर्थन और अवसर मिलने पर सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त व्यक्ति भी जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकता है।












