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FIR दर्ज कराने गई महिला वकील ने लगाए गंभीर आरोप, 14 घंटे अवैध हिरासत और उत्पीड़न का दावा

नई दिल्ली। The India Speaks Desk

नोएडा के सेक्टर-126 थाना परिसर में महिला वकील के साथ कथित यौन उत्पीड़न और अवैध हिरासत के गंभीर आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और यूपी पुलिस को नोटिस जारी करते हुए थाने की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

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मुवक्किल की शिकायत दर्ज कराने पहुंची थीं वकील

महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया है कि वह अपने एक मुवक्किल की ओर से FIR दर्ज कराने के लिए नोएडा के सेक्टर-126 थाने पहुंची थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने न केवल शिकायत दर्ज करने से इनकार किया, बल्कि उन्हें करीब 14 घंटे तक अवैध रूप से थाने में बैठाए रखा गया।


याचिका के अनुसार, महिला वकील के साथ थाने के अंदर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया, उनके साथ अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न हुआ। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें डराने-धमकाने के लिए हथियार तक दिखाए और उनका मोबाइल फोन जबरन लेकर डेटा डिलीट करने का दबाव बनाया गया।


महिला वकील ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के दौरान थाने के CCTV कैमरे या तो बंद थे या जानबूझकर निष्क्रिय कर दिए गए, ताकि सबूत न मिल सके। इसी गंभीर आशंका को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप किया।

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सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने आदेश दिया कि:

“घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और किसी भी स्थिति में न तो उन्हें मिटाया जाए और न ही उनके साथ छेड़छाड़ की जाए।”

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब भी मांगा है।


7 जनवरी 2026 को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला पुलिस कार्यप्रणाली, महिला सुरक्षा और कानून के राज से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। कोर्ट ने केस की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को निर्धारित की है।


इस मामले ने एक बार फिर थानों में महिला सुरक्षा, CCTV निगरानी और पुलिस जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देशभर के वकील संगठनों और मानवाधिकार समूहों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।

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