जनजागरण के संदेश के साथ पातालपानी से चैनपुरा तक निकली ऐतिहासिक यात्रा
कसरावद। The India Speaks Desk
जल, जंगल, जमीन और आदिवासियत के संरक्षण का संदेश लेकर 8 से 15 जनवरी तक आयोजित “जल, जंगल, जमीन व आदिवासियत बचाओ यात्रा” सोमवार को नगर कसरावद पहुंची, जहां आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों द्वारा इसका भव्य स्वागत किया गया।
यह यात्रा पातालपानी (महू, इंदौर) से प्रारंभ होकर एकता परिषद महासम्मेलन स्थल चैनपुरा, नेपानगर (जिला बुरहानपुर) तक निकाली जा रही है। यात्रा का उद्देश्य आदिवासी समाज को उनके प्राकृतिक अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करना है।
यात्रा में शामिल आदिवासी समाज के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने संबोधन में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को जीवन का मूल आधार बताते हुए समाज को संगठित रहने का आह्वान किया।
“यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण का संकल्प है।”
वक्ताओं ने कहा कि यदि आज प्रकृति और आदिवासी अस्तित्व की रक्षा नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
यात्रा से संबंधित समस्त व्यवस्थाएं पूरी तरह जनसहयोग से की जा रही हैं, जो समाज की एकजुटता और जागरूकता को दर्शाता है। इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज कसरावद के अध्यक्ष रंजीत सिंह मंडण्लोई, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार मोहरे, एडवोकेट लखन भांवरें, आदिवासी छात्र संगठन के संरक्षक सोमल चौहान, शंकर मेड़ा, सावन मुजाल्दे, राजेन्द्र वसुनिया, अरविंद भूरिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।












