ओवुलेशन में गड़बड़ी से जुड़ा अत्यंत दुर्लभ मामला
खरगोन। पिपलिया /The India Speaks Desk
प्रकृति जब अपने रहस्यमयी और दुर्लभ स्वरूप में सामने आती है, तो विज्ञान भी उसे समझने के लिए ठहर जाता है। जीवन की उत्पत्ति से जुड़े कुछ दृश्य ऐसे होते हैं, जो आश्चर्य के साथ-साथ संवेदना भी पैदा करते हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ और हृदयस्पर्शी दृश्य खरगोन जिले के पिपलिया क्षेत्र स्थित पिपरिया गांव में सामने आया, जहां एक भैंस ने दो मुंह वाले बछड़े को जन्म दिया।
यह घटना 04 फरवरी 2026 को महेश्वर के पिपलिया के समीपस्थित ग्राम पिपरिया निवासी रामनिवास यादव, पिता शिवराम यादव के पशुबाड़े में घटी।
जन्म के कुछ ही मिनटों में बुझ गया जीवन
ग्रामीणों के अनुसार, बछड़े का जन्म होते ही उसकी असामान्य बनावट स्पष्ट दिखाई दी। हालांकि यह बछड़ा करीब 5 से 10 मिनट तक ही जीवित रह सका और इसके बाद उसकी मृत्यु हो गई।
जन्म के समय से ही उसकी स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही थी।
इस संबंध में जिला पशु चिकित्सा अधिकारी से हुई बातचीत में बताया गया कि यह मामला:
“ओवुलेशन प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण हुआ है। यह अत्यंत रेयर घटना है और खरगोन जिले के इतिहास में संभवतः पहली बार सामने आई है।”
अधिकारी के अनुसार, यह भ्रूण विकास के शुरुआती चरण में होने वाली एक जन्मजात विकृति है।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्यों होता है ऐसा?
पशु विज्ञान में इस स्थिति को डाइसेफेली (Dicephaly) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार:
भ्रूण के प्रारंभिक विकास के दौरान कोशिकाओं का विभाजन पूरी तरह अलग-अलग न हो पाना या ओवुलेशन के समय एक से अधिक अंडाणुओं की असामान्य प्रक्रिया के कारण एक ही शरीर में दो मुख विकसित हो जाते हैं।
ऐसे मामलों में श्वसन, तंत्रिका और पाचन तंत्र पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाते, जिससे जीवन बचना अत्यंत कठिन होता है।












