शिवम यादव की मौत पर दिए गए लिखित आश्वासन का उल्लंघन, जनता बोली – “रोड नहीं तो टोल नहीं”
बड़वाह। लोकेश कोचले। The India Speaks Desk
शनिवार को बड़वाह में महेश्वर रोड स्थित टोल नाके पर भारी बवाल हो गया। कुछ ही दिन पहले जयमलपुरा निवासी 27 वर्षीय शिवम यादव की गड्ढों भरी सड़क पर आयशर वाहन की चपेट में आकर दर्दनाक मौत हुई थी। उस हादसे के बाद आक्रोशित नगरवासियों और युवाओं ने चक्काजाम कर SDM सत्यनारायण दर्रो से लिखित आश्वासन लिया था कि—
“महेश्वर रोड का डामरीकरण होने तक टोल वसूली पूरी तरह बंद रहेगी।”
लेकिन शनिवार को MPRDC ने आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए टोल वसूली दोबारा शुरू कर दी। इसी पर जब लोगों ने विरोध जताया तो टोल कर्मचारियों ने एक महिला से मारपीट कर दी, जिसके बाद आक्रोश चरम पर पहुंच गया।
शिवम यादव की मौत बनी आंदोलन की नींव
गत दिवस हुए हादसे में शिवम यादव सड़क पर बने गहरे गड्ढों की वजह से आयशर वाहन की चपेट में आए थे। उस समय सड़क पर बने गड्ढे उनके खून से भर गए थे। इस हृदयविदारक मंजर ने ही लोगों को सड़क और टोल व्यवस्था के खिलाफ खड़ा कर दिया था। लोगों का सवाल है कि जब सड़कें मौत का जाल बनी हैं, तो टोल वसूली का औचित्य ही क्या है?
महिला पर अत्याचार ने भड़काया जनसैलाब
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शनिवार को जब वाहन चालकों और स्थानीय लोगों ने टोल देने से इनकार किया तो वहां तैनात कर्मचारियों ने एक महिला के साथ मारपीट कर दी। यह खबर फैलते ही आदिवासी समाज, जयस संगठन और बड़ी संख्या में युवा मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते टोल नाके पर “रोड नहीं तो टोल नहीं” और “आदिवासी महिला पर अत्याचार नहीं सहेंगे” जैसे नारे गूंजने लगे।
प्रशासन और टोल प्रबंधन लापता
खबर लिखे जाने तक न तो प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही टोल प्रबंधन का कोई जिम्मेदार सामने आया। SDM का लिखित आदेश कागज़ पर ही रह गया और जमीनी हालात में जनता ठगी हुई महसूस कर रही है।
जनता का सवाल – क्या टोल वसूली मौत से भी बड़ी है?
लोग साफ तौर पर पूछ रहे हैं—
“शिवम यादव की मौत के बाद जो लिखित आदेश दिया गया, वह सिर्फ दिखावा था? क्या प्रशासन और MPRDC के लिए टोल वसूली जनता की जान से भी ज्यादा कीमती है?”












