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खण्डवा/बड़वाह (खरगोन)। लोकेश कोचले | The India Speaks

​बड़वाह में पिछले एक महीने से चल रहे मौत के तांडव पर आखिरकार प्रशासन की नींद टूट गई है। चार निर्दोष युवा और एक बुजुर्ग समेत पाँच जिंदगियाँ सड़क के गड्ढों और अनियंत्रित ट्रकों की भेंट चढ़ गईं, तब जाकर जिलाधिकारी (खंडवा) का यह ‘दया भरा’ आदेश आया है।

​प्रशासन के इस आदेश को जीत कहना उन परिवारों का अपमान होगा, जिन्होंने अपनों को खोया है। यह आदेश नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का शोक पत्र है।

इस आदेश की ‘कीमत’ पाँच लाशें हैं!

​जिलाधिकारी (खंडवा) द्वारा 09.10.2025 को जारी किया गया आदेश एक बड़ा कदम है, लेकिन यह देरी से आया हुआ न्याय है। नागरिक विरोध और लगातार हो रही मौतों के दबाव में प्रशासन ने आंशिक कार्रवाई करते हुए:

  • 20 टन से अधिक भार वाले और 6 चक्के से ज्यादा के भारी मालयान के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
  • ​बाकी भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग (देशगांव होकर खरगौन रोड) से जाने का निर्देश दिया गया है।

प्रश्न यह है: क्या यह आदेश समय पर नहीं आ सकता था? इस प्रतिबंध की स्याही की कीमत उन माँओं से पूछिए जिन्होंने अपने बच्चों की जली हुई लाशें देखीं। यह दिखाता है कि प्रशासन को जागने के लिए नागरिकों की ‘बलि’ का इंतजार

सिर्फ़ प्रतिबंध से नहीं, ‘प्रभावी कार्यवाही’ से रुकेंगी दुर्घटनाएँ!

​प्रशासन ने केवल ‘पैरासिटामोल’ दी है, लेकिन बीमारी की जड़ को खत्म नहीं किया। जिलाधिकारी का आदेश तभी सफल होगा जब निम्नलिखित ‘मौत के कारकों’ पर शून्य-सहिष्णुता (Zero-Tolerance) की कार्यवाही होगी, क्योंकि सड़कों पर मौत के कारण सिर्फ़ भारी ट्रक नहीं हैं:

​1. लापरवाह बस माफिया पर तुरंत नकेल कसी जाए!

​बसों में ठूंस-ठूंस कर सवारी भरी जाती है और ड्राइवर रेस ट्रैक की तरह बसें दौड़ाते हैं। कंडक्टर गेट पर खड़े होते हैं, (इसी लापरवाही से एक कंडक्टर की मौत भी हुई है)।

​2. सड़क को ‘बाप की जागीर’ समझने वालों पर एक्शन हो!

​सड़क को निजी जागीर समझकर 120 की स्पीड में लहराते हुए गाड़ी चलाने वाले आवारा लड़कों पर पुलिस को तुरंत कार्यवाही करनी होगी।

​3. आवारा पशुओं के आतंक पर हो आर्थिक दंड!

​गौ पालकों द्वारा दूध निकालकर गायों को सड़क पर खुला छोड़ देना सीधे तौर पर दूसरों के जीवन को खतरे में डालना है।

प्रशासन, अपनी निष्क्रियता पर खेद व्यक्त करो!

​प्रशासन को इस ‘देर से आए न्याय’ पर और अपनी घोर निष्क्रियता पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना चाहिए।

​बड़वाह को अब सिर्फ़ कागज़ के आदेश नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली ‘प्रभावी कार्यवाही’ चाहिए। जब तक कानून का भय इन सभी लापरवाह तत्वों में पैदा नहीं होगा, बड़वाह की सड़कें असुरक्षित बनी रहेंगी!

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