महिला स्वास्थ्य पर प्रशासन की लापरवाही — “अब और नहीं चलेगा मौन प्रशासन”
सनावद। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
महिला स्वास्थ्य जैसे अत्यंत संवेदनशील विषय पर प्रशासन की लापरवाही अब असहनीय होती जा रही है। सनावद सिविल हॉस्पिटल में लगातार दो माह से गायनोकोलॉजिस्ट का पद खाली है, और हालात यह हैं कि आधी आबादी इलाज के लिए भटक रही है। गर्भवती महिलाएँ सुरक्षित प्रसव के लिए या तो निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का सहारा ले रही हैं या फिर जिला अस्पताल जाने को मजबूर हैं।
तीन दशक बीत जाने के बाद भी इस गंभीर समस्या पर जिम्मेदार विभागों ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
सनावद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जयराम चौधरी ने इस मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि—
“यह स्थिति महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के साथ खिलवाड़ है। तीन दशक तक गायनोकोलॉजिस्ट न होना प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी है। अब इस पद की तत्काल भर्ती नहीं हुई तो उग्र आंदोलन होगा।”
डॉ. चौधरी ने स्वास्थ्य विभाग, विधायक, सांसद और जिला प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की और कहा कि “अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
📞 7772828778 | 7723024600
प्रसव के दौरान जटिल हालात में महिलाओं की जान जोखिम में पड़ती है।
कई बार मरीजों को रातों-रात 40 से 60 किलोमीटर दूर भेजना पड़ता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
निजी अस्पतालों के भारी बिलों का बोझ गरीब परिवारों पर बढ़ रहा है, जबकि ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संकट और गहरा है।
‘मातृ–सुरक्षा’, ‘जननी शिशु सुरक्षा’, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ जैसी योजनाएँ भले ही प्रशासन गिनाए,
लेकिन गायनोकोलॉजिस्ट की कमी ने इन योजनाओं को मज़ाक बना दिया है।
✅ जनता की एक मांग — “पहले गायनोकोलॉजिस्ट दो!”
स्थानीय महिलाओं ने कहा—
“हमारे लिए सबसे ज़रूरी सुरक्षित प्रसव है। यदि यहाँ डॉक्टर नहीं मिलेंगे, तो सरकार इन अस्पतालों को चलाने का ढोंग क्यों कर रही है?”
✅ आंदोलन की चेतावनी — जल्द जुटेगा जनसमर्थन
डॉ. जयराम चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अब जनता पूछ रही है —
आखिर दो माह से रिक्त पद की जिम्मेदारी किसकी है?
कब मिलेगा सनावद को गायनोकोलॉजिस्ट?
और क्या महिला स्वास्थ्य सिर्फ कागज़ों में रहेगा?












