विरोध करने पर जातिसूचक गालियां और गुंडों से धमकाने का आरोप, प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
बड़वाह। The India Speaks Desk
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की बड़वाह तहसील अंतर्गत ग्राम मेहताखेड़ी/नावघाटखेड़ी में एक विधवा दलित महिला की पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता द्वारकी बाई पिता स्वर्गीय तुकाराम, निवासी ग्राम मेहताखेड़ी ने आरोप लगाया है कि गो सेवा के नाम पर उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर न सिर्फ अवैध निर्माण किया जा रहा है, बल्कि वर्षों पुराने फलदार वृक्षों को भी नष्ट कर दिया गया है।
आवेदक के अनुसार ग्राम नावघाटखेड़ी, तहसील बड़वाह में स्थित सर्वे नंबर 38, रकबा 3 एकड़ (ट्री पट्टा भूमि) उनके पिता स्व. तुकाराम मांगीलाल को राजस्व प्रकरण क्रमांक बी-121/33/88-89 के अंतर्गत आजीविका हेतु प्रदान की गई थी।
इस संबंध में 14 अगस्त 1989 को न्यायालय तहसीलदार बड़वाह द्वारा वृक्षारोपण अनुमति प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जिसके तहत आम, इमली, जामुन और महुआ के लगभग 100 पेड़ लगाए गए थे।
बिना अनुमति कब्जा और अवैध निर्माण का आरोप


पीड़िता का आरोप है कि विगत कुछ समय से सोनाली पंवार नामक महिला ने बिना किसी शासकीय अनुमति के उक्त भूमि पर कब्जा कर लिया है। वहां गो पालन के साथ-साथ अवैध निर्माण कार्य भी किया जा रहा है।
द्वारकी बाई ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कब्जे और निर्माण का विरोध किया तो सोनाली पंवार ने गुंडों को बुलाकर उन्हें धमकाया, साथ ही गंदी-गंदी गालियां दीं और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जमीन में न आने की धमकी दी गई।
पीड़िता के अनुसार उनकी जमीन पर मौजूद लगभग 100 फलदार पेड़ों को काटकर नष्ट कर दिया गया, और पूरे खेत को समतल कर दिया गया ताकि अवैध निर्माण आसानी से किया जा सके।
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आवेदक के अनुसार उन्होंने इस मामले की शिकायत तहसीलदार बड़वाह, SDM बड़वाह,
व बड़वाह पुलिस थाना में की है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़िता का आरोप है कि जब वह बड़वाह SDM के पास शिकायत लेकर पहुंचीं, तो उन्होंने कहा—
“तुम्हारे कागज किसी काम के नहीं हैं, इन्हें फेंक दो।”
इस कथित बयान के बाद प्रशासनिक संवेदनशीलता और दलित अधिकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।












