नवभारत की शिक्षा दिशा पर मंथन: शिक्षकों ने साझा किए विचार
खरगोन। The India Speaks Desk
क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, मालवा प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय शोध पद्धति की अवधारणा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शिक्षकों, शोधार्थियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शोध पद्धति की प्रासंगिकता पर विस्तृत विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद श्री गजेन्द्र सिंह पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं में राष्ट्रप्रेम, मातृभूमि के प्रति सम्मान और देश की मिट्टी से जुड़ाव की भावना उत्पन्न करें।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नई शिक्षा नीति में भारत की सांस्कृतिक धरोहर और गौरवशाली इतिहास को सम्मिलित कर नए भारत की नींव रखी है। शिक्षकों का दायित्व है कि वे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप ऐसी पीढ़ी तैयार करें जो राष्ट्र, समाज और मातृभूमि का सम्मान करे।”
कुलगुरु प्रो. मोहन लाल कोरी ने स्वागत भाषण में कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना हमारे लिए उपलब्धि के साथ चुनौती भी है। सामूहिक प्रयासों से संसाधन और सुविधाएं विकसित की जा रही हैं ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सतत वृद्धि हो सके।
नई शिक्षा नीति संस्कृति और राष्ट्र के मूल्यों पर आधारित — ओम प्रकाश शर्मा
विशेष अतिथि, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के श्री ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति राष्ट्र, छात्र और संस्कृति के मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि न्यास देशभर में इस नीति को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कार्य कर रहा है।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में डॉ. आशीष दवे (गुजरात विश्वविद्यालय) ने “भारतीय संदर्भ में शोध की दिशा” विषय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कुल सचिव डॉ. मनोहर दास सोमानी ने अतिथियों का स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किए।
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