पशु आहार के नाम पर ऐसा अपशिष्ट, जो प्रजनन क्षमता खत्म कर पशुओं को स्लॉटर हाउस तक पहुँचा रहा है
बड़वाह। भोपाल | The India Speaks Desk
बड़वाह क्षेत्र में पशु आहार के रूप में बेचे जा रहे DWGS को लेकर चल रहा विवाद अब केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा। अब यह मामला पशु कल्याण, नैतिकता और मांस आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों और जमीनी तथ्यों के आधार पर यह सवाल गहराने लगा है कि — क्या DWGS दुधारू पशुओं को धीरे-धीरे मांस उत्पादन की ओर धकेलने का माध्यम बन रहा है?
पशु चिकित्सा अधिकारी की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता
खरगोन के पशु चिकित्सा अधिकारी श्री गुलाबसिंह सोलंकी पहले ही इस विषय पर स्पष्ट चेतावनी दे चुके हैं कि:
“DWGS शराब निर्माण के दौरान प्राप्त अपशिष्ट है, जिसमें कई रासायनिक तत्व मौजूद रहते हैं।
इसमें यूरिया जैसे तत्व और अल्कोहल के अंश पशुओं की चेतना को प्रभावित करते हैं,
जिससे वे अस्थायी रूप से अधिक दूध देते हैं, लेकिन उनकी प्रजनन क्षमता घटती जाती है।
लगातार सेवन से पशुओं का लीवर डैमेज होता है और अंततः वे अनुपयोगी हो जाते हैं।”
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई दुधारू पशु प्रजनन और उत्पादन दोनों में कमजोर हो जाता है, तो पशुपालक उसे रखने में असमर्थ हो जाते हैं।
दूध से मांस तक की खामोश यात्रा
यही वह बिंदु है जहाँ यह मामला केवल “गलत पशु आहार” का नहीं रह जाता।
स्थानीय पशुपालकों और पशु विशेषज्ञों का कहना है कि:
- DWGS खिलाने से पशु का उत्पादक जीवन छोटा हो जाता है
- प्रजनन क्षमता खत्म होने पर वह दुधारू पशु नहीं रह जाता
- अंततः ऐसे पशुओं को काटने के लिए भेज दिया जाता है
इस दृष्टि से देखें तो यह एक ऐसी इनडायरेक्ट प्रक्रिया बनती है,
जिसमें दुधारू पशु धीरे-धीरे मांस प्राप्त करने वाले पशु में बदल जाता है।
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बीफ सप्लाई चेन से जुड़ता सवाल
हाल ही में भोपाल के स्लॉटर हाउस को लेकर सामने आई घटनाओं के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि:
बड़ी संख्या में मांस आपूर्ति के लिए पशु आखिर आ कहाँ से रहे हैं?
क्या ऐसे पशु, जिनका दुग्ध और प्रजनन जीवन DWGS जैसे अपशिष्ट से नष्ट हुआ अंततः मांस आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन रहे हैं?
यदि ऐसा है, तो यह विषय धार्मिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि: पशु हिंसा, नैतिक अपराध, और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।
पशु अधिकारों से जुड़े जानकारों का मानना है कि:
किसी पशु को जानबूझकर ऐसा आहार देना, जो उसकी प्राकृतिक प्रजनन क्षमता नष्ट कर दे, पशु क्रूरता की श्रेणी में आता है।
यदि अंतिम परिणाम मांस प्राप्ति है, तो यह प्रक्रिया अप्रत्यक्ष पशु हिंसा कहलाएगी।
अब उठ रही है प्रतिबंध की मांग
DWGS को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि:
- DWGS को पशु आहार के रूप में तत्काल प्रतिबंधित किया जाए
- शराब कंपनियों द्वारा इसके विक्रय की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच हो
- और यह सुनिश्चित किया जाए कि दूध देने वाले पशु मांस उद्योग की कच्ची सामग्री न बनें
सवाल जो सिस्टम को जवाब देना होगा
- क्या DWGS को पशु आहार के रूप में बेचने की अनुमति दी गई हैं?
- क्या इसके दीर्घकालिक प्रभावों का कोई वैज्ञानिक मूल्यांकन हुआ?
- और अगर इससे पशु मांस आपूर्ति की ओर धकेले जा रहे हैं,
- तो क्या यह समाज और नीति — दोनों के साथ धोखा नहीं?












