रिपोर्ट: द इंडिया स्पीक्स ब्यूरो
खरगोन (म.प्र.)। खरगोन जिले में एक निजी चिकित्सक द्वारा कथित तौर पर ‘गलत इंजेक्शन’ लगाए जाने की खबर के प्रकाशन के बाद, कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल के निर्देशन में जिला प्रशासन ने त्वरित जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई नागरिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
3 संदिग्ध औषधियां परीक्षण के लिए भेजी गईं
औषधि निरीक्षक श्री अशोक गोयल ने शुक्रवार (10 अक्टूबर 2025) को मामले की जांच करते हुए मेसर्स न्यू कैश केमिस्ट से उपयोग की गई तीन औषधियों के नमूने लिए। इन नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण के लिए तत्काल औषधि प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
रिकॉर्ड में अनियमितता पर 3 मेडिकल स्टोर्स को कारण बताओ नोटिस
जांच के दायरे में आए श्री गुरु कृपा मेडिकल स्टोर्स, श्री गोकुलदास मेडिकल और पाटीदार मेडिकल स्टोर्स खरगोन पर बड़ी कार्रवाई की गई है। निरीक्षण के दौरान इन संस्थानों ने औषधियों के क्रय-विक्रय (खरीद और बिक्री) संबंधी अनिवार्य रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए।
इस गंभीर अनियमितता के कारण तीनों मेडिकल स्टोर्स के संचालकों को कारण बताओ सूचना पत्र (Show Cause Notice) जारी किए गए हैं। प्राप्त जवाब के पश्चात आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
प्रतिबंधित कफ सिरप पर भी निगरानी
प्रशासन ने जिले में प्रतिबंधित (बैन कॉम्बिनेशन) और अवमानक (Substandard) कफ सिरप की उपलब्धता की भी सघन जांच की। सभी औषधि विक्रेताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित या अवमानक कफ सिरप का क्रय-विक्रय न करें। निरीक्षण के दौरान हालांकि अवमानक कफ सिरप का कोई संग्रहण नहीं पाया गया।
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द इंडिया स्पीक्स की राय: हर जान कीमती, चिकित्सा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
खरगोन जिले में ‘गलत इंजेक्शन’ की जांच और मेडिकल स्टोर्स पर रिकॉर्ड की कमी का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप (Coldrif) पीने से 20 से अधिक मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। इन मौतों का कारण सिरप में खतरनाक औद्योगिक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मिलावट पाई गई थी, जिसने बच्चों की किडनी को फेल कर दिया।
यह पृष्ठभूमि खरगोन प्रशासन की वर्तमान जांच को और भी महत्वपूर्ण बना देती है। रिकॉर्ड न रखने वाले मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई करना इसलिए आवश्यक है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सी दवा कहाँ से आई और कहाँ बेची गई। दवाइयों के क्रय-विक्रय का उचित रिकॉर्ड न होना सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
कलेक्टर सुश्री मित्तल के निर्देश पर त्वरित जांच एक स्वागत योग्य कदम है। प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर ऐसी मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई हो, जिससे कोई भी निजी क्लीनिक या मेडिकल स्टोर दवाइयों की गुणवत्ता, रिकॉर्ड और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ न कर सके। चिकित्सा और औषधि वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही ही प्रदेश में हुई हालिया त्रासदियों को रोकने का एकमात्र रास्ता है।












