परिजनों और अपात्र खातों में डाली गई सरकारी राशि, निजी ऑपरेटर पर भी कार्रवाई के निर्देश
खरगोन। The India Speaks Desk
आर.बी.सी.-6(4) के तहत राहत राशि वितरण में सामने आई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल के निर्देश पर तहसील कार्यालयों में पदस्थ चार सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इस पूरे प्रकरण में संलिप्त निजी ऑपरेटर के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
शासकीय सेवा से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में संतोष मंडलोई (तहसील भीकनगांव), मनीष चौहान (तहसील भगवानपुरा), प्रवीण मंडलोई (तहसील भगवानपुरा), मनोज कदम (तहसील खरगोन ग्रामीण) शामिल हैं। वहीं निजी ऑपरेटर श्याम सोलंकी के विरुद्ध गोगांवा तहसीलदार को नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुई लाखों की अनियमितता
महालेखाकार, मध्यप्रदेश, ग्वालियर के ऑडिट प्रतिवेदनों में खुलासा हुआ कि इन कर्मचारियों द्वारा पात्र हितग्राहियों की राहत राशि का दुरुपयोग कर लाखों रुपये अपात्र व्यक्तियों के खातों में स्थानांतरित किए गए।
भीकनगांव तहसील में पदस्थ संतोष मंडलोई द्वारा अपने पुत्र, पत्नी, एक ठेकेदार एवं उसके पुत्र के खातों में राशि डाली गई।
प्रवीण मंडलोई और मनोज कदम ने निजी ऑपरेटर श्याम सोलंकी के माध्यम से पात्र हितग्राहियों की राहत राशि अन्य अपात्र लोगों के खातों में डलवाई।
भगवानपुरा तहसील के मनीष चौहान द्वारा राहत राशि स्वयं, पत्नी, पिता एवं बहन के खातों में डाली गई।
मामले में मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 14 के अंतर्गत अनुशासनात्मक जांच प्रक्रिया पूरी की गई। जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद चारों कर्मचारियों पर नियम 10 के तहत नियम 9 के अंतर्गत दीर्घ शास्ति अधिरोपित करते हुए उन्हें शासकीय सेवा से बर्खास्त किया गया।
प्रशासन की इस कार्रवाई को राहत राशि जैसे संवेदनशील मामलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता नीति के रूप में देखा जा रहा है।











