खरपतवार मुक्त खेत, स्प्रिंकलर सिंचाई और नीम आधारित दवाओं का छिड़काव अपनाएं
खरगोन। The India Speaks Desk |
जिले में मिर्च की फसल इन दिनों थ्रिप्स (ब्लैक थ्रिप्स) के प्रकोप से प्रभावित हो रही है। किसानों को समय रहते इसके प्रबंधन के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उप संचालक उद्यान केके गिरवाल ने बताया कि थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए स्वच्छ खेती, खरपतवार मुक्त खेत, बार-बार गुड़ाई और स्प्रिंकलर सिंचाई बेहद जरूरी है।
खेत की सफाई और पौधों की देखभाल
अधिकारियों ने कहा कि सबसे पहले मिट्टी में रहने वाले थ्रिप्स के प्यूपा को खत्म करने के लिए बार-बार निदाई-गुडाई करें। खेत में जमे हुए पानी को बाहर निकालें और खरपतवार हटाकर खेत को स्वच्छ रखें। संक्रमित पौधों के शीर्ष प्ररोहों को तोड़कर नष्ट करें तथा गंभीर प्रकोप वाले पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबाएं या जलाएं।
सिंचाई और खाद का संतुलित उपयोग
फसल की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। सिंचाई के लिए ड्रिप या स्प्रिंकलर प्रणाली अपनाने से थ्रिप्स की संख्या नियंत्रित की जा सकती है।
📞 7772828778 | 7723024600
कीटनाशक और दवाओं का छिड़काव
नीम आधारित एजाडिरेक्टिन (3000 पीपीएम) का 2 मिली प्रति लीटर पानी में छिड़काव करें।
अधिक प्रकोप पर फिप्रोनिल 5% एससी (800-1000 मिली/हेक्टेयर) या साइंट्रानिलिप्रोएल 10.26% ओडी (600 मिली/हेक्टेयर) का छिड़काव करें।
दवाओं का छिड़काव सुबह 11 बजे से पहले करें और हर सप्ताह दवा बदलें।
स्प्रे पंप से पौधे के नीचे से ऊपर की ओर छिड़काव करें ताकि पत्तों और फूलों के निचले हिस्से में छिपे कीट भी नियंत्रित हों।
किसानों से अपील
किसानों को सलाह दी गई है कि वे एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल न करें, बल्कि परिस्थिति के अनुसार कीटनाशकों में बदलाव करें। अधिक जानकारी और मार्गदर्शन के लिए किसान जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र से संपर्क कर सकते हैं।












