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पीजी कॉलेज खरगोन में 27 अक्टूबर से 8 नवंबर तक चल रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम

खरगोन। The India Speaks Desk
नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी अध्यादेश 14(1) और 14(2) के अंतर्गत पीजी कॉलेज खरगोन में विद्यार्थियों का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.एस. चौहान के निर्देशन में आयोजित किया गया है और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खरगोन के विद्यार्थियों के लिए 27 अक्टूबर से 8 नवंबर 2025 तक चलेगा।

समग्र विकास और अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में नई शिक्षा नीति नोडल अधिकारी डॉ. जियालाल अकोले ने विद्यार्थियों को अध्यादेश 14(1) और 14(2) के मुख्य बिंदुओं से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि अध्यादेश 14(1) विद्यार्थियों के समग्र विकास और व्यावहारिक अनुभव आधारित शिक्षा पर बल देता है।

“अब प्रत्येक विद्यार्थी को प्रोजेक्ट वर्क, इंटर्नशिप, फील्ड विजिट और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में भाग लेना अनिवार्य होगा,” — डॉ. जियालाल अकोले

उन्होंने आगे कहा कि यह पहल केवल अंक आधारित शिक्षा से हटकर अनुभव और प्रयोग आधारित सीखने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

सतत मूल्यांकन से निखरेगा विद्यार्थियों का प्रदर्शन

डॉ. अकोले ने बताया कि अध्यादेश 14(2) के तहत विद्यार्थियों का मूल्यांकन अब सतत आंतरिक मूल्यांकन (Continuous Internal Assessment) के आधार पर किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों की उपस्थिति, सहभागिता, परियोजना प्रस्तुति और कौशल प्रदर्शन को विशेष महत्व मिलेगा।

“नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को रोज़गारयोग्य, स्वावलंबी और नवाचार-समर्थ नागरिक बनाना है,” — डॉ. अकोले

उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थी अपने विषय के साथ-साथ लोकल नॉलेज, जीवन कौशल, पर्यावरण जागरूकता और उद्यमिता के अवसरों से भी जुड़ेंगे।

प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने साझा किए दिशा-निर्देश

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. गणेश पाटिल ने विद्यार्थियों को परियोजना कार्य, रिपोर्ट लेखन, डेटा संकलन और मूल्यांकन प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में अनुसंधान प्रवृत्ति और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी।

वहीं डॉ. राजू देसाई ने नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में हुए नवीन बदलावों की चर्चा करते हुए बताया कि विद्यार्थियों को अब वैकल्पिक विषयों की स्वतंत्रता, बहु-विषयक अध्ययन और कौशल आधारित शिक्षा का अवसर मिलेगा।

डॉ. रमेश चौहान ने विद्यार्थियों को विषयवार प्रशिक्षण की रूपरेखा, अध्यायवार अध्ययन सामग्री और नई शिक्षण पद्धति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों के संतुलन की दिशा में अग्रसर करेगा।

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