41 वर्षों की अनुकरणीय सेवा के बाद गांव में उमड़ा सम्मान का सैलाब
खरगोन/सिलोटिया। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
आगर मालवा जिले के प्रतिष्ठित व सम्माननीय व्यक्तित्व श्री गिरधारी लाल सीताराम ओसारी (जी. एल. ओसारी जी) ने जिला जेल, आगर में जेल अधीक्षक के पद से अपने 41 वर्षों की लम्बी, अनुकरणीय व सफल सेवा के उपरांत सेवानिवृत्ति प्राप्त की। उनके इस गौरवशाली सेवा-काल के समापन पर उनके गृह ग्राम पंचायत सिलौटिया में हर्षोल्लास, सम्मान और गर्व का वातावरण देखने को मिला।
सेवानिवृत्ति के उपलक्ष्य में ग्रामवासियों द्वारा डीजे, जुलूस व भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। गांव की गलियों में जब जी. एल. ओसारी जी खुले वाहन में सवार होकर पहुँचे, तब हर ओर “जी. एल. ओसारी जी अमर रहें”, “गांव का गौरव – ओसारी जी को नमन” जैसे नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
ग्रामीणों, परिजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने फूल-मालाओं, आतिशबाज़ी और जयकारों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
श्री ओसारी जी का सरकारी सेवा जीवन अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम और मानवता के मूल्यों का प्रेरक उदाहरण रहा है। जेल प्रशासन में रहते हुए उन्होंने हमेशा सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और कैदियों के पुनर्वास व समाज में पुनः स्थापित होने हेतु अनेक सकारात्मक प्रयास किए।
उनके अधीन कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों ने उन्हें एक कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में हमेशा याद किया है।
“समाज सेवा का संकल्प अब और मजबूत” – ओसारी जी
गांव पहुंचने पर आयोजित सम्मान समारोह में वक्ताओं ने ओसारी जी की कार्यशैली, समाज सेवा के प्रति उनकी भावना और गांव के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें “सच्चे जनसेवक और प्रेरणा स्रोत” की संज्ञा दी। युवाओं ने कहा कि ओसारी जी ने यह साबित किया है कि सच्ची लगन और ईमानदारी से किया गया कार्य न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र को गौरवान्वित करता है।
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“सरकारी सेवा तो समाप्त हो गई, लेकिन समाज सेवा का मेरा संकल्प आज से और भी मजबूत हो गया है।
जो प्रेम और सम्मान मुझे मेरे गांव ने दिया है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।”
— श्री गिरधारी लाल सीताराम ओसारी
समारोह में ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य, वरिष्ठ नागरिक, युवक-युवतियां व सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
दिनभर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा, और यह दिन पूरे सिलौटिया गांव के लिए गौरव दिवस बन गया।












