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इंदौर, मध्य प्रदेश। ग्वालियर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर पर एक अधिवक्ता द्वारा की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी का विरोध अब राजधानी से दूर, मध्य प्रदेश की व्यावसायिक नगरी इंदौर तक पहुँच गया है। इस विवादित बयान को लेकर दलित समाज में व्याप्त भारी आक्रोश के बीच, एससी महासभा ने इंदौर प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मामला और विरोध का कारण

​मामला ग्वालियर से जुड़ा है, जहाँ 5 अक्टूबर 2025 को अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी के सामने आने के बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने मिश्रा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन दलित संगठनों द्वारा सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है।

इंदौर में SC महासभा की पहल

​विरोध की इस कड़ी में, 12 अक्टूबर को एससी महासभा के एक प्रतिनिधिमंडल ने इंदौर के खजराना थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव को इंदौर कलेक्टर महोदय के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि अनिल मिश्रा के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में तत्काल मामला दर्ज किया जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

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दलित समाज में भारी आक्रोश: “बाबा साहब संविधान की आत्मा हैं”

​मीडिया से चर्चा करते हुए एससी महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एवं पत्रकार निर्मल रोकड़े ने बयान पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “अनिल मिश्रा के बयान से संपूर्ण दलित समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। बाबा साहब अंबेडकर संविधान की आत्मा हैं, और उनका अपमान देश के करोड़ों अनुयायियों और स्वयं न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

​रोकड़े ने शासन-प्रशासन से ऐसे भड़काऊ और अमर्यादित बयान देने वाले लोगों के खिलाफ उचित और सख्त कार्रवाई करने पर जोर दिया।

राजनीतिक और सामाजिक विवाद

​यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एक ओर जहाँ दलित संगठन सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर में कुछ वकीलों और संगठनों द्वारा अनिल मिश्रा के समर्थन में भी प्रदर्शन किए गए हैं। इंदौर में ज्ञापन सौंपा जाना यह दर्शाता है कि यह मुद्दा केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे प्रदेश में दलित चेतना को झकझोर रहा है और राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर एक बड़ा विवाद खड़ा कर चुका है।

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​ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से हाईकोर्ट एडवोकेट विजेन्द्र गहलोत, शुभम बिल्लौरे, कांशीराम चकोरे, सुनिल रोकड़े, महेश कन्चोलै, राजा पठान, विजय जाटवा, राहुल पंवार, अभिषेक कोचले आदि साथी उपस्थित रहे। इंदौर की यह पहल मामले में कार्रवाई की गति को तेज करने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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