स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के रूबरू कार्यक्रम में अभिनेता पंडित ने साझा की जीवनगाथा
इंदौर। The India Speaks Desk
सुप्रसिद्ध अभिनेता चेतन पंडित ने इच्छा जताई है कि उनकी जन्मभूमि देवास में कला एवं संस्कृति को समर्पित अंतर्राष्ट्रीय स्तर का केंद्र स्थापित हो। उन्होंने कहा कि इसके लिए वे स्वयं अपनी ओर से भूमि उपलब्ध कराने को तैयार हैं। पंडित का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में जो संघर्ष और कठिनाइयाँ देखीं, वे नई पीढ़ी को न झेलनी पड़े, इसलिए यह पहल जरूरी है।
कला और संस्कृति के लिए बड़ा सपना
स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के “रूबरू” कार्यक्रम में चेतन पंडित ने कहा कि छोटे और बड़े परदे पर लगभग तीन दशकों का अनुभव अर्जित करने के बाद वे मानते हैं कि नई पीढ़ी को उच्च श्रेणी के प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधा की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि देवास, इंदौर और उज्जैन के कलाकारों के लिए यह केंद्र न केवल प्रशिक्षण देगा बल्कि मंच प्रदर्शन के अवसर भी प्रदान करेगा।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
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गंगाजल, अपहरण, लोकनायक, राजनीति, चक्रव्यूह, जंजीर, तक्षक जैसी फिल्मों और अनेक टीवी धारावाहिकों में अभिनय कर चुके चेतन पंडित ने अपने संघर्ष के दौर को भी याद किया। उन्होंने कहा:
“जब मैं इंदौर से नाट्य अभिनय की शिक्षा लेकर मुंबई गया, तब मुझे हतोत्साहित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन कड़ी मेहनत और समर्पण ने मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया कि अमिताभ बच्चन और नाना पाटेकर जैसे दिग्गजों के साथ भी अभिनय करते समय कभी कठिनाई नहीं आई।”
उन्होंने फिल्म लोकनायक को अपने जीवन का श्रेष्ठ काम बताया।
नवोदित कलाकारों के लिए संदेश
चेतन पंडित ने युवाओं से कहा कि सफलता के लिए केवल अभिनय ही नहीं बल्कि कॉस्ट्यूम, लाइटिंग, वीडियोग्राफी और म्यूजिक जैसे क्षेत्रों का ज्ञान भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने खुद देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में पीजी डिप्लोमा किया था, जिसने उनके करियर में बड़ी भूमिका निभाई।
ओटीटी और बदलती संस्कृति पर राय
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बढ़ती हिंसा और अश्लीलता के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब यह व्यक्तिगत सेंसरशिप का मामला है। नई पीढ़ी समझदार है और अपने निर्णय खुद लेने में सक्षम है।
कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम में चेतन पंडित का स्वागत प्रवीण खारीवाल, पंकज क्षीरसागर, दीपक माहेश्वरी, राजीव घोलप, अर्जुन नायक, रेशमा द्विवेदी, निष्ठा मौर्य, इदरीस खत्री और नितीश उपाध्याय ने किया। सोनाली यादव ने स्मृति चिन्ह और गोविन्द लाहोटी ‘कुमार’ ने कैरिकेचर भेंट किया। संचालन मोहन वर्मा ने किया।












