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लोकेश कोचले/ द इंडिया स्पीक्स

इंदौर। मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक गहरा दाग लगाने वाले MY अस्पताल ‘चूहा कांड’ के विरोध में छेड़ा गया आंदोलन आख़िरकार समाप्त हो गया है। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) ने लगातार आठ दिनों तक अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरना देकर प्रशासन को सकते में डाल दिया था। यह विरोध प्रदर्शन इतना ज़ोरदार था कि ज़िला प्रशासन को बातचीत की मेज पर आना पड़ा।

​यह पूरा मामला नवजात बच्चों की आईसीयू (NICU) में चूहों द्वारा कुतरे जाने और उसके बाद दो बच्चियों की मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।

​1. MY अस्पताल: जहाँ बच्चों की जान चूहों के हवाले थी

​MY अस्पताल में हुई यह घटना सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रमाण थी।

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  • गंभीर चूक: NICU जैसे अति संवेदनशील वॉर्ड में चूहों की मौजूदगी ने अस्पताल की स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) और मरीज़ सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे।
  • मौत पर विवाद: अस्पताल प्रशासन ने भले ही दावा किया कि मौतें जन्मजात बीमारियों (Congenital Anomalies) से हुईं, लेकिन चूहों के काटने की घटना ने पीड़ित आदिवासी परिवारों और जनता के बीच अविश्वास पैदा कर दिया था।
  • निलंबन की मांग: JAYS ने साफ़ मांग रखी कि इस सामूहिक लापरवाही के लिए डीन और अधीक्षक को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाए, उन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज़ हो, और उन्हें पद से निलंबित किया जाए।

​पिछले आठ दिनों में, JAYS के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और ₹1-1 करोड़ के मुआवज़े की मांग को लेकर अस्पताल परिसर को घेरे रखा, जिसने पूरे इंदौर का ध्यान खींचा।

​2. 8 दिन के बाद क्यों टूटा गतिरोध? प्रशासन और JAYS के बीच सहमति

​आठ दिनों तक चले इस मज़बूत आंदोलन को समाप्त करने में इंदौर ज़िला प्रशासन की संवाद शैली ने अहम भूमिका निभाई। प्रशासन ने किसी भी तरह के टकराव या तकरार से बचते हुए धैर्य और सहजता का परिचय दिया।

  • सुबह से देर रात तक संवाद: JAYS के नेताओं और प्रशासन के बीच सुबह से लेकर देर रात 8 बजे तक कई दौर की गहन बातचीत हुई।
  • कलेक्टर का रोल: इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और उनकी टीम ने इस पूरे मामले में एक नया उदाहरण पेश किया। उन्होंने जयस के नेताओं की सभी चिंताओं को सब्र से सुना, जिससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली हुई।
  • आंदोलन पर विराम: ज़िला प्रशासन के आश्वासनों से संतुष्ट होकर JAYS संगठन ने देर रात आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। JAYS नेताओं ने सरकार के आदिवासी समाज के प्रति संवेदनशील होने की उम्मीद जताई और कहा कि वे आगामी फैसलों पर भरोसा करते हैं।

​इस शांतिपूर्ण समझौते ने, फिलहाल, अस्पताल परिसर में तनाव ख़त्म कर दिया है। अब देखना यह है कि MY अस्पताल में प्रशासनिक फेरबदल और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु सरकार क्या बड़े और कड़े फ़ैसले लेती है।

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इस समझौते के बाद आपकी क्या राय है? क्या अब आपको MY अस्पताल में सुधार की उम्मीद है?

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