जल चालीसा लेखक रमेश गोयल ने चेताया – “यदि पानी बचाया नहीं तो मानव जीवन संकट में”
इंदौर। The India Speaks
जल संरक्षण को लेकर चिंता जताते हुए जल चालीसा लिखने वाले जल स्टार रमेश गोयल ने कहा कि आधुनिकीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण पेड़-पौधों का तेजी से विनाश हो रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन और पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है।
नदियों और भूजल पर संकट
गोयल ने कहा कि नदियों में लगातार गंदगी और जहरीला कचरा डाला जा रहा है, वहीं नलकूपों से अति भूजल दोहन के कारण जल स्तर तेजी से गिर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यही स्थिति रही तो 2030 तक आधी आबादी को पीने का पानी उपलब्ध नहीं होगा।
भयावह उदाहरण
उन्होंने बताया कि –
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चेन्नई में भूजल पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
साउथ अफ्रीका की राजधानी केपटाउन में भीषण जल संकट हुआ।
ऑस्ट्रेलिया में पानी की कमी के चलते 5000 ऊंटों को मारना पड़ा।
आंकड़े जो डराते हैं
देश के 5723 जल ब्लॉकों में से 60% डार्क ज़ोन में पहुंच चुके हैं। शेष भी तेजी से उसी ओर बढ़ रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो पानी के बिना मानव जीवन संकट में पड़ जाएगा।
समाधान का सुझाव
गोयल ने कहा कि –
वर्षा जल संग्रहण (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देना होगा।
खेती में फव्वारा सिंचाई पद्धति अपनानी चाहिए।
धान, गन्ना जैसी पानी अधिक खपत वाली फसलें छोड़कर तिलहन और दलहन की खेती करनी चाहिए।
पानी की बर्बादी रोकने के लिए टोंटी बेकार न चलने देने का संकल्प लेना होगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे का जिक्र करते हुए कहा –
“वर्षा का जल, जहां भी गिरे, जब भी गिरे, संग्रहित करें।”
स्वागत व सम्मान
प्रारंभ में श्री गोयल ने अपनी पुस्तक बिन पानी सब सून और जल चालीसा की प्रतियां मीडियाकर्मियों को भेंट कीं। उनका स्वागत प्रवीण खारीवाल, कृष्णकांत रोकड़े, रवि चावला, देवेंद्र जायसवाल, सुदेश गुप्ता और दीपक माहेश्वरी ने किया। वहीं कार्टूनिस्ट गोविंद लाहोटी ‘कुमार’ ने कैरिकेचर भेंट किया।












