राजस्थान के भोपालगढ़ कुंभारा धूणा के संत श्री बुधनाथजी महाराज भी पहुंचे आश्रम
ओंकारेश्वर| The India Speaks
तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर के नर्मदा तट स्थित ग्राम बिल्लौरा में इस वर्ष एक भव्य धार्मिक आयोजन का आगाज हुआ है। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने अपना वार्षिक चातुर्मास यहाँ प्रारंभ किया है। इस दौरान वे आगामी चार महीनों तक नर्मदा किनारे रहकर भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देंगे। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक होने वाले इस चातुर्मास का शुभारंभ महाराज ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन पूजन के साथ किया। इसके बाद वे ग्राम बिल्लौरा स्थित अपने आश्रम में चातुर्मास के लिए पहुंचे। यह आश्रम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से मात्र 6 किमी की दूरी पर थापना गांव के समीप नर्मदा किनारे स्थित है।
भक्तों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
गुरुजी के भक्तों द्वारा इस चार महीने की अवधि के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आश्रम में दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए दोनों समय भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहती है। लगभग 15 से 17 वर्षों से इस स्थान पर संचालित आश्रम में भक्तों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
संतों का आगमन
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इस चातुर्मास के चलते आस-पास सहित बाहरी क्षेत्रों के संत-महात्माओं का भी आगमन हो रहा है। इसी क्रम में राजस्थान के भोपालगढ़ कुंभारा धूणा के संत श्री बुधनाथ जी महाराज भी बिल्लौरा आश्रम पहुंचे। वे काटकुट के बाबूलाल सारंग, रामप्रसाद पटेल, युग जाट और राजवीर पटेल के साथ आश्रम आए और उन्होंने संत अवधेशानंद जी महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।
जूना अखाड़ा और संत अवधेशानंद जी
गौरतलब है कि पंजाब से आने वाले श्री अवधेशानंद जी महाराज को उनके भक्त “सूरत कुंड वाले गुरुजी” के नाम से भी जानते हैं। वे जूना अखाड़ा के प्रमुख संत हैं, जो नागा साधुओं का सबसे बड़ा और प्राचीन समूह है। उनका चातुर्मास 6 जून 2025 से शुरू होकर 1 नवंबर 2025 को देवउठनी ग्यारस तक चलेगा, जिसके बाद वे अपनी अगली यात्रा पर प्रस्थान करेंगे।












