- क्या “बहनजी (मायावती) कांशीराम साहब को ब्लैकमेल करती थीं?”
- “क्या मायावती उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांशीराम पर दबाव बनाती थीं?”
- “क्या आकाश आनंद के पिता ने कांशीराम साहब के सिर पर पिस्टल रख दी थी?”
लखनऊ/ द इंडिया स्पीक्स डेस्क
बहुजन राजनीति के युवा चेहरे और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पर निजी और राजनीतिक चरित्र हनन का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। यह संकट उनकी पुरानी सहयोगी और पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी द्वारा जारी किए गए कथित ऑडियो क्लिप्स से उपजा है, जिसने न सिर्फ चंद्रशेखर के व्यक्तिगत जीवन पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती और संस्थापक कांशीराम के संबंधों पर भी बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी कर राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है।
रोहिणी घावरी द्वारा सोशल मीडिया पर लीक किए गए ये ऑडियो क्लिप्स महज निजी विवाद नहीं, बल्कि बहुजन आंदोलन की नींव को खोखला करने की एक गहरी साजिश की तरफ इशारा करते हैं।
रोहिणी घावरी का विस्फोटक दावा: ‘मायावती कांशीराम को ब्लैकमेल करती थीं’
यह विवाद तब ‘खतरनाक’ मोड़ पर पहुंचा जब रोहिणी घावरी ने दावा किया कि कथित बातचीत में चंद्रशेखर आजाद ने बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर बेहद घटिया सोच का परिचय दिया। रोहिणी के अनुसार, ऑडियो में चंद्रशेखर यह कहते सुने जा सकते हैं:
- “बहनजी (मायावती) कांशीराम साहब को ब्लैकमेल करती थीं।”
- “मायावती उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांशीराम पर दबाव बनाती थीं।”
- “आकाश आनंद के पिता ने कांशीराम साहब के सिर पर पिस्टल रख दी थी।”
अगर ये दावे सच हैं और यह आवाज़ चंद्रशेखर की है, तो यह टिप्पणी सिर्फ मायावती का अपमान नहीं, बल्कि बहुजन राजनीति के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत कांशीराम साहब के संघर्ष और विरासत पर हमला है। रोहिणी घावरी ने इसे “बहुजन आंदोलन को खत्म करने की साजिश” करार दिया है, जो इस विवाद की भयावहता को दिखाता है।
सत्ता का लालच और नैतिक पतन
रोहिणी घावरी शुरुआत से ही चंद्रशेखर पर शादी का झांसा देकर शोषण करने का आरोप लगाती रही हैं। उन्होंने दावा किया है कि चंद्रशेखर ने खुद को अविवाहित बताया और सांसद बनने के बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बहुजन समाज के लिए ‘न्याय’ और ‘सम्मान’ की लड़ाई लड़ने वाले एक युवा नेता का नैतिक पतन क्या इतना हो चुका है? यह ऑडियो क्लिप उस नेता की मानसिकता को उजागर करता है, जो एक तरफ कांशीराम का वारिस बनने की बात करता है, और दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी की मुखिया को गाली देने और उन पर निजी हमले करने से नहीं चूकता। क्या यह सत्ता पाने की हताशा है, या बहुजन एकता को तोड़ने की सोची समझी रणनीति?
भीम आर्मी चीफ की चुप्पी: कब देंगे जवाब?
इस विस्फोटक खुलासे पर चंद्रशेखर आजाद ने चुप्पी साध रखी है। उनका कहना है कि चूंकि मामला कोर्ट में है, इसलिए वे कोर्ट में ही जवाब देंगे।
लेकिन सवाल यह है कि एक जननेता अपने लाखों समर्थकों और बहुजन समाज के सामने इन गंभीर आरोपों पर सीधे जवाब क्यों नहीं दे रहा? क्या कोर्ट का सहारा लेना सिर्फ आरोपों से बचने का एक आसान रास्ता है? रोहिणी घावरी ने तो ऑडियो क्लिप को ‘फर्जी’ साबित करने पर एक करोड़ रुपये का इनाम देने की चुनौती भी दी है। चंद्रशेखर की यह चुप्पी कहीं न कहीं इन आरोपों को और भी ज्यादा मजबूत कर रही है।
बहुजन आंदोलन, जिसे कांशीराम और मायावती ने दशकों की मेहनत से खड़ा किया था, आज अपने ही एक युवा नेता की विवादित टिप्पणियों के कारण शर्मसार हो रहा है। चंद्रशेखर को जवाब देना होगा। समाज के सामने या अदालत में। पर यह बात साफ है कि इस विवाद ने बहुजन राजनीति की दिशा और दशा को एक बड़ा झटका दिया है।












