रिपोर्ट: लखनऊ/ गुरुवार 23 अक्टूबर 2025
द इंडिया स्पीक्स डेस्क
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर पार्टी में सख्त अनुशासन की मिसाल पेश की है। उन्होंने गुरुवार को बसपा के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में से एक और संगठन में महत्वपूर्ण पद संभाल रहे शमशुद्दीन राईन (Shamsuddin Raini) को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
राईन पर अनुशासनहीनता और गुटबाजी को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बसपा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए अपने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है।
निष्कासन का कारण और आरोप
- पदभार: निष्कासन से पहले, शमशुद्दीन राईन लखनऊ और कानपुर मंडल के केंद्रीय कोऑर्डिनेटर और प्रभारी थे।
- पार्टी का आरोप: बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राईन लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और संगठन के भीतर गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे थे।
- चेतावनी की अनदेखी: बयान में यह भी कहा गया है कि राईन को उनकी कार्यशैली में सुधार लाने के लिए कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने पार्टी लाइन और अनुशासन का पालन नहीं किया।
- संगठन में गड़बड़ी: सूत्रों के अनुसार, राईन पर संगठनात्मक जिम्मेदारियों के तहत आने वाले क्षेत्रों में मेहनती कार्यकर्ताओं को हटाने और टिकट वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें भी मायावती तक पहुँची थीं।
राईन का पलटवार: ‘मिस्ड कॉल’ बना कारण?
बसपा द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को शमशुद्दीन राईन ने खारिज कर दिया है। उन्होंने अपने निष्कासन को अप्रत्याशित और चौंकाने वाला बताया।
राईन ने दावा किया कि उनके निष्कासन का कारण गुटबाजी या अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि एक मिस्ड कॉल हो सकता है।
”मैं ठीक महसूस नहीं कर रहा था, इसलिए आज (गुरुवार) मैं बहनजी (मायावती) का फोन कॉल नहीं उठा सका। मैंने लगभग एक घंटे बाद उन्हें वापस कॉल किया। शायद तब तक वह मुझसे नाराज हो चुकी थीं।”
राईन ने इसे ही कार्रवाई का संभावित कारण बताया है।
मायावती की ‘नो टॉलरेंस’ नीति
शमशुद्दीन राईन बसपा के एक कद्दावर ओबीसी मुस्लिम नेता थे। 2017 में पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के निष्कासन के बाद, राईन ने ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पार्टी में मुस्लिम चेहरे के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली थी।
- हालिया प्रशंसा: दिलचस्प बात यह है कि 9 अक्टूबर को बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में आयोजित विशाल रैली में राईन ने लखनऊ और कानपुर मंडल से लाखों की भीड़ जुटाई थी, जिसके लिए मायावती ने मंच से उनकी प्रशंसा भी की थी।
- अंतिम संदेश: इसके बावजूद, मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी में व्यक्तिगत प्रदर्शन से ज़्यादा अनुशासन और संगठन के प्रति वफादारी मायने रखती है। यह कार्रवाई 2027 चुनाव से पहले पार्टी में सख्त संदेश देने का काम करेगी।
बसपा अध्यक्ष ने पार्टी और आंदोलन के हित में राईन को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है।












