CM हेल्पलाइन में शिकायत बंद, लेकिन सवाल अब भी कायम
बड़वाह। The India Speaks Desk । लोकेश कोचले
बड़वाह क्षेत्र के ग्राम Khodi, Badwah में स्थित Associated Alcohols & Breweries Limited के DWGS मामले में पिछले छह महीनों से लगातार शिकायतें, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
लगातार उठते सवालों के बीच अब यह मामला राज्य से लेकर केंद्र तक पहुंच चुका है, जबकि दूसरी ओर आधिकारिक जांच रिपोर्टों में अब तक किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है।
लगातार हुई शिकायतें और खबरें
पिछले छह महीनों में इस मामले को लेकर कई शिकायतें दर्ज कराई गईं और स्थानीय स्तर पर इस विषय पर लगातार खबरें भी प्रकाशित हुईं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि प्लांट से निकलने वाला DWGS (Distillery Wet Grain Solids) और दूषित जल पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
इसी आधार पर कई बार जांच की मांग उठाई गई।
जानकारी के अनुसार अधिकारियों द्वारा 02 जनवरी 2026, 04 फरवरी 2026 और 01 मार्च 2026 को उद्योग का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने बताया कि उद्योग में स्थापित दूषित जल उपचार संयंत्र संचालित पाया गया तथा किसी प्रकार का अपशिष्ट जल बाहर निकलने की स्थिति नहीं पाई गई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्लांट में लगे ड्रायर के माध्यम से DWGS को DDGS में परिवर्तित किया जा रहा है और उसका भंडारण किया जा रहा है।
CM हेल्पलाइन में शिकायत बंद
इसी आधार पर CM Helpline 181 में दर्ज शिकायत को असत्य बताते हुए बंद कर दिया गया।
लेकिन शिकायतकर्ता ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट और जमीनी स्थिति में अंतर दिखाई देता है।
“यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो फिर प्लांट परिसर से गीली भूसी लगातार बाहर कैसे आ रही है?”
— शिकायतकर्ता
शिकायतकर्ता ने दोबारा उठाया मुद्दा
शिकायतकर्ता ने CM हेल्पलाइन को भेजे गए मेल में कहा है कि वास्तविक स्थिति की पुनः स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि निरीक्षण शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच हाल ही में Madhya Pradesh Pollution Control Board के इंदौर कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर पिछले पांच वर्षों में इस प्लांट के खिलाफ दर्ज शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।
यह दस्तावेज आने के बाद इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।
गौरतलब है कि इस प्रकरण की शिकायत पहले ही Ministry of Environment, Forest and Climate Change तक पहुंच चुकी है।
पर्यावरण से जुड़े मामलों में अंतिम स्तर पर जांच और कार्रवाई के लिए Central Pollution Control Board और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी हस्तक्षेप कर सकती हैं।
छह महीनों में कई जांच और निरीक्षण होने के बावजूद सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि RTI से सामने आने वाले दस्तावेज और आगे की जांच इस पूरे विवाद की सच्चाई को किस दिशा में ले जाती है।












