महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत शाला परिसर में हुआ आयोजन
बड़वाह। The India Speaks Desk
भारत के कुछ समाजों में आज भी विवाह जैसी सामाजिक संस्था को ऐसी कुप्रथाओं से जोड़ा जाता है, जिसमें कम उम्र की बालिकाओं का विवाह वयस्क पुरुषों से कर दिया जाता है। वहीं, कई स्थानों पर माता-पिता द्वारा बचपन में ही भविष्य का विवाह तय कर देना भी बाल विवाह की एक प्रचलित प्रथा रही है। समाज में फैली इसी गंभीर कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ पूरे देश में संचालित किया जा रहा है।
“बाल विवाह समाज के भविष्य के लिए घातक” — परियोजना अधिकारी अनिल जैन
“बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह समाज और देश के भविष्य के लिए भी घातक है। इसे रोकने के लिए हर नागरिक को जागरूक और जिम्मेदार बनना होगा।”
ये उद्गार बड़वाह महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अनिल जैन ने बाल विवाह विरोधी शपथ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
इस दौरान महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर ममता राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि सांदीपनि शाला परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शाला की छात्राओं को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर शाला की प्राचार्य हंसा कानूड़े की गरिमामयी उपस्थिति रही।


शिक्षक सतविंदर सिंह भाटिया ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उन्हें कहीं भी बाल विवाह से संबंधित कोई गतिविधि दिखाई दे, तो वे तुरंत अपने अभिभावकों या नजदीकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को इसकी सूचना दें।
शपथ कार्यक्रम के दौरान मंजुला मालवीय, सीमा भार्गव, राधिका बिरला, आराधना राठौर, माधुरी उपाध्याय सहित अन्य शिक्षक साथी उपस्थित रहे और अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।












