बड़वाह/खरगोन। पत्रकार लोकेश कोचले की 181 पर शिकायत के बाद, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB), इंदौर के अधिकारी श्री अंकित बघेल के नेतृत्व में एक टीम ने ग्राम खोड़ी स्थित एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड शराब फैक्ट्री की जाँच की। इस दौरान कंपनी प्रबंधन न सिर्फ ‘ज़ीरो डिस्चार्ज’ नियम तोड़ता मिला, बल्कि टीम के पहुँचते ही साक्ष्य छिपाने की भी पुरजोर कोशिश की गई।
PCB ने मौके पर पकड़ा उल्लंघन: पानी छोड़ते रंगे हाथ


जाँच के समय, कंपनी से लगातार दूषित पानी बाहर छोड़ा जा रहा था। निरीक्षण अधिकारी श्री अंकित बघेल ने इसे देखते ही कंपनी प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और रिसाव तुरंत रोकने का निर्देश दिया।
- PCB टीम ने मौके से छोड़े जा रहे गंदे पानी का सैंपल लिया।
- शिकायतकर्ता किसान भारत सिंह काग के कुएं के पानी का भी सैंपल लिया गया, जिसकी जाँच रिपोर्ट से प्रदूषण की गंभीरता सामने आएगी।
DWGS की अवैध बिक्री पर पर्दा डालने की कोशिश
कंपनी के नियम गीले अपशिष्ट DWGS (Distilled Wet Grain Soluble) को सुखाकर (DDGS बनाकर) ही बाहर भेजने की अनुमति देते हैं। इस उल्लंघन की जाँच के दौरान कंपनी ने साक्ष्य छिपाने की हर संभव कोशिश की:
- जब टीम बाहर छोड़े जा रहे पानी का निरीक्षण कर रही थी, कंपनी के अंदर DWGS निकालने का काम पूरी तरह बंद कर दिया गया और उस स्थान की सफाई कर दी गई।
- पत्रकार लोकेश कोचले के हस्तक्षेप पर जब अधिकारी उस लोडिंग पॉइंट तक पहुँचे, जहाँ से गीली भूसी ट्रकों में लोड होती है, तो तीनों लोडिंग पॉइंट बंद पाए गए।
- हालाँकि, उस जगह की गंदी दीवारें और प्रभावित फर्श इस बात की गवाही दे रहे थे कि वहाँ अवैध रूप से DWGS निकालकर बेचा जा रहा था। इस दौरान मीडिया को वीडियो भी नहीं बनाने दिया गया।
- श्री बघेल ने DWGS इकट्ठा होने वाले स्थान का भी औचक निरीक्षण किया।
PCB का असहयोगपूर्ण रवैया, पंचनामे में ‘अवैध बिक्री’ गायब
जाँच अधिकारी श्री बघेल की टीम ने मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी:
- अधिकारियों ने पत्रकारों को कोई बाइट नहीं दी और पंचनामा की फोटो भी नहीं लेने दी।
- सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि, मौके पर DWGS की अवैध निकासी के साक्ष्य (बंद पॉइंट और गंदी दीवारें) मिलने के बावजूद, तैयार किए गए पंचनामे में इस ‘अवैध बिक्री’ या ‘गीली भूसी’ के निकाले जाने का कोई जिक्र नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश और PCB के इस असहयोगपूर्ण रवैये पर सवाल खड़े करते हुए प्रशासन से मांग की है कि जाँच रिपोर्ट आने के बाद कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर भी ध्यान दिया जाए।












