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जयमलपुरा में जब्त सरकारी केबल मामले में लीपापोती के आरोप, जिम्मेदार अधिकारी मौन

बड़वाह। The India Speaks Desk

बड़वाह शहर के जयमलपुरा क्षेत्र में नहर के पास मिले सरकारी केबल ड्रम कांड की जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक न तो किसी ठोस निष्कर्ष की घोषणा हुई और न ही एफआईआर सार्वजनिक रूप से सामने आई है। हालात यह संकेत दे रहे हैं कि मामले की जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे केबल कांड में कई प्रभावशाली चेहरे शामिल हो सकते हैं, यही कारण है कि जांच को जानबूझकर अधर में लटकाया गया है। यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हो, तो सरकारी संपत्ति के गबन से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

RTI से हुआ बड़ा खुलासा

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों में सामने आया है कि कनिष्ठ यंत्री कार्यालय बड़वाह द्वारा पत्र क्रमांक 315/क.य./बड़वाह/ग्राम./दिनांक 25/07/25 को पुलिस थाना बड़वाह को सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का उल्लेख किया गया था।
पत्र में बताया गया है कि 25 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 2:20 बजे, अधीक्षण यंत्री के निर्देश पर गठित चेकिंग दल द्वारा ग्राम जयमलपुरा के पास नहर किनारे, बैग फैक्ट्री के पीछे एवं हाइवे के पास खेत में जांच की गई। जांच के दौरान उपभोक्ता प्रेमचंद पिता हीरालाल मालाकार के परिसर से 25 स्क्वायर एमएम की 4 ड्रम बंच केबल बरामद हुई, जिन पर MPWZ अंकित था।
यह स्पष्ट करता है कि उक्त केबल मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की सरकारी संपत्ति है, जिसे अवैध रूप से कब्जे में रखा गया था।

मौके पर पुलिस को दी गई सूचना, फिर भी FIR गायब

जांच के बाद कनिष्ठ यंत्री द्वारा पूरे घटनाक्रम की जानकारी कार्यपालन यंत्री आलिंद देशपांडे को दी गई। इसके पश्चात थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर केबल जब्त कराई गई और उसे 33/11 केवी जयमलपुरा केंद्र पर रखवाया गया। मौके पर पंचनामा और बयान में भी अवैध केबल रखने की पुष्टि दर्ज है।
इसके बावजूद आज तक न तो एफआईआर की प्रति सामने आई और न ही किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की गई।

अधिकारियों का बयान

“केबल कांड मामले को लेकर पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कराने हेतु आवेदन दिया गया है। अभी तक एफआईआर सामने नहीं आई है। पहले लापरवाही में दो लोगों पर कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
— आलिंद देशपांडे, कार्यपालन यंत्री, म.प्र.प.क्षे. वि.वि.कं.लि., बड़वाह

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी संपत्ति की बरामदगी, पंचनामा और विभागीय पत्राचार मौजूद है, तो पांच महीने बाद भी जांच शून्य पर क्यों है?
क्या यह मामला भी फाइलों में दबाकर भुला दिया जाएगा, या फिर सच सामने आएगा?

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