सेरेब्रल पाल्सी से जूझते हुए 36 वर्षों का शोध, नवाचार और सेवा बना देश के लिए प्रेरणा
करनाल। राजेंद्र करनाल | The India Speaks
करनाल सहित पूरे देश के लिए यह गर्व का विषय है कि सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित प्रख्यात शोधकर्ता, नवाचारक और लेखक डॉ. रीतेश सिन्हा को स्वास्थ्य नवाचार और समावेशी विकास के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए “ACE Book of Records 2025” में स्थान दिया गया है।
डॉ. रीतेश सिन्हा पिछले 36 वर्षों से अधिक समय से निरंतर शोध, प्रयोग और सेवा के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सरल, सशक्त और सम्मानजनक बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं।
‘रीतेश मुद्रा’ और विशेष तकनीकों से बदली ज़िंदगियाँ
डॉ. सिन्हा द्वारा विकसित “रीतेश मुद्रा” एक विशिष्ट हस्तमुद्रा तकनीक है, जिसे मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं में सहायक माना जा रहा है। इसके साथ ही उनकी “रीतेश पेंसिल पकड़ने की विधि” न्यूरो-मोटर नियंत्रण और लेखन क्षमता को बेहतर बनाने में प्रभावी साबित हो रही है।
डॉ. सिन्हा का योगदान केवल चिकित्सा और शोध तक सीमित नहीं है। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विशेष रूप से अनुकूल वस्त्रों का डिज़ाइन किया है। साथ ही “रीट्राइक” नामक पैरों से चलने वाली विशेष तिपहिया साइकिल विकसित की है, जो दिव्यांगजनों को स्वतंत्र गतिशीलता और आत्मनिर्भरता प्रदान करती है।
एक संवेदनशील लेखक के रूप में डॉ. सिन्हा की पुस्तकें “Understanding Cerebral Palsy” और “Wings of the Heart” दिव्यांगजनों, उनके अभिभावकों और समाज को नई सोच, समझ और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं।
ACE Book of Records की मान्यता
ACE Book of Records ने डॉ. रीतेश सिन्हा की इन बहुआयामी उपलब्धियों को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 के संस्करण में शामिल किया है और उनके कार्यों को भारत में समावेशी स्वास्थ्य, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताया है।
सम्मान पर डॉ. सिन्हा की प्रतिक्रिया
“यह सम्मान केवल मेरा नहीं है, यह हर उस व्यक्ति का है जो विकलांगता के बावजूद सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस रखता है।”
ACE Book of Records 2025 में नाम दर्ज होने के साथ ही डॉ. रीतेश सिन्हा की यह उपलब्धि न केवल करनाल बल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण बन गई है।
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