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शराब कंपनी से रोज़ाना सैकड़ों टन जहरीला अपशिष्ट बाहर, मानव-पशु स्वास्थ्य खतरे में—प्रशासनिक अनदेखी पर गंभीर सवाल

बड़वाह। The India Speaks Desk

बड़वाह क्षेत्र में शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, ग्राम खोड़ी से निकल रही जहरीली DWGS (Distillery Wet Grain Solubles) गीली भूसी का अवैध व्यापार अब किसी एक विभाग की लापरवाही नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड—तीनों की सामूहिक चुप्पी का गंभीर उदाहरण बन चुका है।
यह पूरा मामला न तो नया है और न ही छुपा हुआ। इसके बावजूद आज तक न कोई निर्णायक कार्रवाई, न पूर्ण प्रतिबंध और न ही जिम्मेदारी तय की गई, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शराब निर्माण से पहले अनाज को सड़ाया जाता है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए अनाज में यूरिया सहित कई खतरनाक रसायन मिलाए जाते हैं, जिससे वह जल्द गल-सड़ जाए।
शराब बनने के बाद यही सड़ा-गला, यूरिया मिश्रित अनाज गीली भूसी के रूप में DWGS बनकर निकलता है। नियमों के अनुसार यह एक खतरनाक औद्योगिक अपशिष्ट है, जिसे—
ड्रायर से सुखाना अनिवार्य है ।
वही गिला अपशिष्ट कंपनी परिसर से बाहर निकालना प्रतिबंधित है इसे Zero Liquid Discharge (ZLD) नियमों के तहत नियंत्रित करना आवश्यक है।
लेकिन मुनाफे की लालच में इन सभी नियमों को दरकिनार कर दिया गया है।

400–500 टन रोज़ाना निकास—इतना बड़ा खेल और किसी को “दिखाई नहीं देता”?

सूत्रों के अनुसार शराब कंपनी से प्रतिदिन 400 से 500 टन तक DWGS गीली भूसी बाहर निकाली जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा का रोज़ाना परिवहन ट्रकों, अड्डों और नेटवर्क के बिना असंभव है।
इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन का कहना है—
“हमें ऐसी कोई गतिविधि दिखाई नहीं दे रही।”
हैरानी की बात यह है कि DWGS के भंडारण और वितरण का एक बड़ा अवैध अड्डा तहसील कार्यालय के ठीक पास संचालित हो रहा है, जहां से दिनभर वाहन निकलते देखे जा सकते हैं।
यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच गंभीर विरोधाभास को उजागर करती है।

बिचौलियों का नेटवर्क—8 से 10 रुपये किलो में बिक रहा ज़हर

कंपनी द्वारा यह जहरीली गीली भूसी सीधे बिचौलियों को बेची जा रही है, जो इसे 8 से 10 रुपये प्रति किलो की दर से पशुपालकों तक पहुंचा रहे हैं।
पशुपालक इसे सस्ता चारा समझकर पशुओं को खिला रहे हैं, लेकिन इसके दुष्परिणाम बेहद गंभीर हैं—

  • पशुओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है
  • दूध बदबूदार और अस्वाभाविक हो रहा है
  • यही दूध बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों द्वारा सेवन किया जा रहा है

विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया और रसायनयुक्त दूध लंबे समय में मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: निरीक्षण हुए, पर कार्रवाई क्यों नहीं?

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह भली-भांति ज्ञात है कि—
DWGS को बाहर निकालना प्रतिबंधित है
गीली अवस्था में इसका परिवहन नियमों का उल्लंघन है, इसका सीधा असर पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ता है।
इसके बावजूद निरीक्षणों के बाद भी सिर्फ चेतावनियां दी गईं, न तो प्लांट सील हुआ, न परिवहन रोका गया।
यह रवैया बोर्ड की भूमिका और गंभीरता दोनों पर सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय, जिला प्रशासन और PCB—तीनों जनता के कटघरे में ?

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक शराब कंपनी की अनियमितता नहीं रह गया है। सवाल तीनों स्तरों पर हैं—

  • स्थानीय प्रशासन को खुले अड्डे क्यों नहीं दिखते?
  • जिला प्रशासन को सैकड़ों टन रोज़ाना अपशिष्ट की जानकारी क्यों नहीं?
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियम जानते हुए भी कार्रवाई से क्यों बच रहा है?

जब सभी विभागों के संज्ञान में यह मामला है, तो फिर
👉 कार्रवाई क्यों नहीं?
👉 जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?
👉 जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही?

DWGS का यह अवैध व्यापार अब—पर्यावरण अपराध, खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़ और प्रशासनिक निष्क्रियता तीनों का उदाहरण बन चुका है।
The India Speaks यह स्पष्ट करता है कि जब तक
दोषियों पर ठोस कार्रवाई, अड्डों पर सीलिंग और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती,
तब तक इस पूरे मामले की जांच और रिपोर्टिंग जारी रहेगी।

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