सिंधी समाज द्वारा 25 वर्षों से जारी है सेवा परंपरा
करही। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
“इक ओंकार सतनाम करता पुरख, निरभउ निरवैरु अकाल मूरति, अजूनी सैभं गुर प्रसादि।”
सिख धर्म के प्रथम गुरु और संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के पावन अवसर पर नगर करही स्थित सिंधी धर्मशाला में विशाल लंगर का आयोजन किया गया।
इस आयोजन का संचालन स्थानीय सिंधी समाज परिवार द्वारा किया गया, जिसमें नगर करही के लोगों सहित आसपास के ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर प्रसादी ग्रहण की।
कार्यक्रम में लगभग 4000 लोगों ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
लंगर के दौरान श्रद्धालुओं ने गुरु नानक देव जी के भजनों और कीर्तन के साथ धार्मिक वातावरण में सहभागिता की।
नगर परिषद करही के उपाध्यक्ष श्री महेश आसवानी ने कहा कि —
“गुरु नानक देव जी ने प्रेम, एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देकर मानव समाज को नई दिशा दिखाई। उनके उपदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।”
गुरु पर्व पर उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब
गुरु नानक जयंती, जिसे गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है, सिख और सिंधी समाज के लिए आस्था और भक्ति का प्रतीक पर्व है।
करही नगर में यह पर्व हर वर्ष अत्यंत श्रद्धा और सेवा भाव से मनाया जाता है।
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स्थानीय सिंधी समाज के महेश आसवानी, जय कुमार सबनानी, राजेश सबनानी, राज कुमार चौथानी, चंद्रकुमार नेभानी, मनोहर सबनानी, रमेश सबनानी सहित अन्य परिवारों द्वारा पिछले 25 वर्षों से निरंतर इस विशाल लंगर का आयोजन किया जा रहा है।












