पंजीयन और स्लॉट के बावजूद रोका गया कपास, हंगामे के बाद खरीदा गया माल
करही/खरगोन। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
करही मंडी में भारतीय कपास निगम (CCI) पर किसानों के साथ खुलेआम मनमानी और बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों का कहना है कि CCI अधिकारी जानबूझकर अच्छी गुणवत्ता वाले कपास को भी “हिट” और “नमी” का बहाना बनाकर रोक रहे हैं, जिससे किसान मजबूर होकर कम दामों में बाजार में माल बेचने को विवश हो रहे हैं।
तीन ट्रैक्टर रोके, एक किसान मजबूरी में लौटा
यह पूरा मामला 18 दिसंबर का बताया जा रहा है। करही मंडी में कपास लेकर पहुंचे किसानों के तीन ट्रैक्टर CCI द्वारा रोक दिए गए।
किसानों का आरोप है कि—
एक किसान का पंजीयन और स्लॉट बुक होने के बावजूद कपास नहीं खरीदा गया जिससे मजबूर होकर किसान को बाजार में कम दाम पर कपास बेचकर लौटना पड़ा।
शेष दो ट्रैक्टरों का माल भी गुणवत्ता में अच्छा होने के बावजूद “हिट लगने” का हवाला देकर रोक दिया गया।
सुबह CCI की ओर से साफ कहा गया कि कपास में “हिट” है, इसलिए खरीदी नहीं होगी। लेकिन जब किसानों ने इसका विरोध किया और मंडी में हंगामा हुआ, तब नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार महोदय के इशारे पर CCI अधिकारी देवदास मुले ने दोनों ट्रैक्टरों का माल वापस लिया।
किसानों का कहना है कि यदि वे विरोध नहीं करते, तो उनका माल भी नहीं लिया जाता।
किसानों ने खोली व्यवस्था की पोल
किसानों ने बातचीत में कई गंभीर बातें सामने रखीं—
रोज अच्छे माल को भी इसी तरह रोका जा रहा है
खराब माल हो तो किसान खुद मानते हैं कि पूरा भाव नहीं मिलना चाहिए
CCI ने खुद कपास की पांच कैटेगरी तय की हैं, फिर भी जानबूझकर खरीदी रोकी जाती है
यह पूरा खेल बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
जब इस पूरे मामले पर CCI अधिकारी देवदास मुले से सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा—
“सुबह ओस की वजह से कपास में नमी थी, इसलिए खरीदी रोकी गई थी। दोपहर में किसानों की रिक्वेस्ट पर माल ले लिया गया।”
📞 7772828778 | 7723024600
किसानों का कहना है कि—
उसी दिन मंडी में कई अन्य वाहन खरीदे गए
यदि ओस की वजह से नमी थी, तो सिर्फ तीन ट्रैक्टरों में ही नमी कैसे थी?
बाकी वाहनों के माल में ओस का असर क्यों नहीं दिखा?
इन्हीं सवालों के चलते CCI की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में आ गई है।
अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
या फिर किसानों को इसी तरह परेशान और मजबूर किया जाता रहेगा?
किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।












