भाजपा मंडल उपाध्यक्ष पर भेदभाव के आरोप, प्रशासन की निष्पक्षता पर उठे प्रश्नचिह्न
करही। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
नगर परिषद करही में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद ने कार्रवाई के दौरान गरीब दुकानदारों और ठेले वालों की गुमटियां तो हटा दीं, लेकिन भाजपा मंडल उपाध्यक्ष महेन्द्र सोनी और उनके रिश्तेदारों के अतिक्रमण को हाथ तक नहीं लगाया गया।
जुलाई माह में नगर परिषद करही द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कई छोटे दुकानदारों की दुकानें और ठेले तोड़ दिए गए। यह दुकाने वर्षों से चल रही थीं और गरीब परिवारों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख साधन थीं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में भेदभाव स्पष्ट दिखाई दिया, क्योंकि जिन व्यापारियों के राजनीतिक संबंध थे, उनके अतिक्रमण को untouched रखा गया।
“हमसे कहा गया कि पूरे बाजार से अतिक्रमण हटेगा, पर सिर्फ गरीबों की दुकानें गिरीं। बड़े लोगों के ठिकाने वैसे ही बने हैं।”
— एक स्थानीय दुकानदार, करही
अभियान के दौरान भाजपा मंडल उपाध्यक्ष महेन्द्र सोनी ने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि त्योहार खत्म होते ही मुख्य मार्ग पर स्थित उनके रिश्तेदारों की दुकानें भी तोड़ी जाएंगी।
हालांकि त्योहार बीतने के बाद भी नगर परिषद की कार्रवाई वहीं ठहरी रही। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई करने से बच रहा है।
शहरवासियों का आरोप है कि नगर परिषद का रवैया गरीबों के प्रति कठोर और रसूखदारों के प्रति नरम है। जिन दुकानदारों का जीविकोपार्जन इन छोटी दुकानों पर निर्भर था, वे अब बेरोज़गार हो गए हैं।
लोगों की मांग है कि या तो मुख्य मार्ग के सभी अतिक्रमणों पर समान कार्रवाई की जाए या फिर जिन गरीबों की दुकानें तोड़ी गई हैं, उन्हें वैकल्पिक स्थान पर पुनः दुकानें आवंटित की जाएं।












