करही नगर में शीतलहर के बीच 6:30 बजे से संचालित हो रहीं कोचिंग, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
खरगोन/करही। प्रभु रंसोरे | The India Speaks
करही नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों शीतलहर और कड़ाके की ठंड का प्रकोप लगातार बना हुआ है। अल सुबह तापमान बेहद नीचे चला जाता है, इसके बावजूद निजी कोचिंग संस्थान सुबह 6:30 बजे से ही कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। ठंड के इस भीषण दौर में छात्र-छात्राओं को मजबूरी में घरों से निकलकर कोचिंग पहुंचना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई छात्र पैदल या दोपहिया वाहनों से सुबह-सुबह कोचिंग पहुंचते नजर आ रहे हैं। घने कोहरे और ठिठुरन भरी सर्दी में बच्चों का इस तरह बाहर निकलना अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
अभिभावकों की मजबूरी, विरोध करने से डर
अभिभावकों का कहना है कि कोचिंग संचालक मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज कर समय पर कोई बदलाव नहीं करते। यदि कोई अभिभावक विरोध करता है, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का डर बना रहता है। इसी मजबूरी के चलते कई पालक चुप रहने को विवश हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार करही नगर में संचालित कई निजी कोचिंग संस्थानों के शासकीय पंजीकरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह स्पष्ट नहीं है कि सभी कोचिंग संस्थान नियमों के तहत पंजीकृत हैं या नहीं। नियमों के अनुसार बिना शासकीय अनुमति किसी भी कोचिंग सेंटर का संचालन प्रतिबंधित है, इसके बावजूद कई कोचिंग खुलेआम संचालित हो रही हैं।
जिम्मेदारी तय करने में विभागों की टालमटोल
निज प्रतिनिधि द्वारा जब कोचिंग संचालकों से सवाल किए गए, तो उन्होंने किसी भी प्रश्न का स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल प्रतिक्रियाएं दीं।
इस संबंध में जब महेश्वर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रामलाल चौहान से फोन पर चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा—
“यह मामला जिला शिक्षा अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है।”
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया—
“प्राइवेट कोचिंग मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, यह सहायक आयुक्त महोदय के अंतर्गत आता है।”
जब जिला सहायक आयुक्त से बात की गई, तो उन्होंने भी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर डालते हुए कहा—
“कोचिंग क्लासेस शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।”
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लगातार जिम्मेदारी टालने की स्थिति से यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर निजी कोचिंग संचालकों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। क्या प्रशासनिक मिलीभगत है या फिर किसी राजनीतिक दबाव के चलते नियमों की अनदेखी हो रही है? या फिर यूं ही नियमों को ताक पर रखकर कोचिंग संचालित होती रहेंगी?
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नगर में संचालित सभी निजी कोचिंग संस्थाओं का तत्काल निरीक्षण किया जाए, उनके पंजीकरण की जांच हो और ठंड के मौसम को देखते हुए बच्चों के हित में कोचिंग के समय को पुनः निर्धारित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो।












