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“धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षक” विषय पर गूंजा शासकीय महाविद्यालय कसरावद

विद्वानों ने कहा — “माता अहिल्याबाई केवल मालवा की महारानी नहीं, बल्कि धर्मनायिका और लोकमाता थीं”

कसरावद। The India Speaks Desk
शासकीय महाविद्यालय कसरावद में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जयंती के अवसर पर एकदिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का विषय था — “धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर की रक्षक — लोकमाता देवी अहिल्या”।


कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश ठाकुर और संयोजक डॉ. विजय सिंह मंडलोई द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भक्ति और प्रेरणा का वातावरण बना रहा।

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🎓 मुख्य अतिथियों के उद्बोधन

डॉ. आर. सी. दीक्षित, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, इंदौर ने कहा —

“माता देवी अहिल्याबाई भारतीय इतिहास की उन दुर्लभ महिलाओं में से हैं जिन्होंने धर्म, सेवा और शासन के समन्वय से समाज को नई दिशा दी। वे केवल मालवा की महारानी नहीं थीं, बल्कि लोकमाता और आदर्श शासिका थीं।”

डॉ. जी. एस. चौहान, प्राचार्य, अग्रणी महाविद्यालय ने कहा —

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“देवी अहिल्या ने शासन में धार्मिक सहिष्णुता और समानता को नींव बनाया। उन्होंने यह प्रमाणित किया कि नेतृत्व केवल पुरुष का अधिकार नहीं है।”

डॉ. आर. एन. पाठक, प्राध्यापक, बीएचयू वाराणसी ने कहा —

“माता अहिल्याबाई का नाम भारतीय इतिहास में पुण्यश्लोका के रूप में अंकित है। उनका शासनकाल करुणा, नीति और लोककल्याण का आदर्श उदाहरण है।”

डॉ. संतोष कुमार चरण साहब, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर ने कहा —

“उन्होंने अपने जीवन में विभव का त्याग किया और समस्त संपत्ति जनता के कल्याण में समर्पित की। उन्होंने काशी, सोमनाथ, केदारनाथ, द्वारका जैसे धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण से सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा दी।”


कार्यक्रम का संचालन डॉ. दयाराम राजपूत द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन संयोजक डॉ. विजय सिंह मंडलोई ने किया।
वेबीनार में 350 से अधिक शिक्षाविद, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी देशभर से जुड़े।
कार्यक्रम में डॉ. शोभाराम सोलंकी, डॉ. रश्मि चौहान, प्रो. मंगल भाटिया, दीपक राठौड़, महेंद्र पटेल, सी. के. हिगीले, पी. एन. बाडूकिया सहित अनेक शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे।

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