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खरगोन | (विशाल भमोरिया)

आधुनिक युग में जहाँ हम समानता के दावे करते हैं, वहीं जिले के रमनगांव से रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक आदिवासी मजदूर, महेंद्र डावर, को सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीटा गया क्योंकि उसने अपने परिवार के साथ कहीं जाने के लिए दो दिन की छुट्टी मांगी थी। दबंगों की लाठियों ने न केवल महेंद्र का हाथ तोड़ा, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा के दावों की भी धज्जियां उड़ा दीं।

बस का इंतजार कर रहे परिवार पर हमला

जानकारी के मुताबिक, महेंद्र पिछले कुछ समय से लोकेश और राजेश पाटीदार के यहाँ मजदूरी कर रहा था। शनिवार सुबह वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मेहमान नवाजी के लिए जाने हेतु बस स्टैंड पर खड़ा था। तभी आरोपी वहां पहुंचे और छुट्टी लेने की बात पर गाली-गलौज शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि देखते ही देखते आरोपियों ने नीम की मोटी सोंटी (डंडे) से महेंद्र पर हमला कर दिया। इस हमले में महेंद्र का हाथ फ्रैक्चर हो गया और उसकी पीठ व पैरों पर गहरे नीले निशान पड़ गए।

अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर

पिटाई के बाद अधमरी हालत में महेंद्र को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसके हाथ में मल्टीपल फ्रैक्चर की पुष्टि की है। पीड़ित का कहना है कि उसने पहले ही सूचित कर दिया था, लेकिन दबंगों ने उसे अपनी ‘जागीर’ समझते हुए इस क्रूरता को अंजाम दिया।

प्रमुख बिंदु जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं:

SC/ST एक्ट का खुला उल्लंघन: आरोपियों ने न केवल शारीरिक चोट पहुंचाई, बल्कि जातिगत अपमान भी किया।

राजनीतिक संरक्षण का आरोप: बताया जा रहा है कि आरोपी स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई में देरी की आशंका जताई जा रही है।

मानवाधिकारों का हनन: एक मजदूर को अपनी मर्जी से अवकाश लेने का अधिकार है, जिसे हिंसा के दम पर कुचला गया।

समाज में उबाल: उठ रही हैं ये माँगें
इस घटना के बाद आदिवासी समाज और स्थानीय लोगों में भारी रोष है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निम्नलिखित कदम नहीं उठाए गए तो उग्र आंदोलन किया जाएगा:

तत्काल गिरफ्तारी: आरोपियों पर हत्या के प्रयास और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा जाए।

सुरक्षा और मुआवजा: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जाए।

कठोर मिसाल: प्रशासन ऐसी कार्रवाई करे जिससे भविष्य में किसी गरीब या आदिवासी पर हाथ उठाने से पहले अपराधी दस बार सोचें।

“न्याय की गुहार”
“मैंने बस दो दिन की छुट्टी मांगी थी, क्या गरीब होना गुनाह है? उन्होंने मेरे बच्चों के सामने मुझे इस तरह मारा जैसे मैं इंसान नहीं हूँ।” – महेंद्र डावर (पीड़ित)

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