राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में बच्चों ने दिखाया अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम
बड़वाह। The India Speaks Desk
प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार शाम नगर में बाल पथ संचलन का आयोजन किया। इस संचलन में 16 वर्ष तक की आयु के 250 से अधिक बाल स्वयंसेवक शामिल हुए जिन्होंने गणवेश में कदमताल करते हुए नगर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए राष्ट्रभक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया।
बाल स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियां जब घोष की मधुर धुन के साथ आगे बढ़ीं, तो सड़कों के दोनों ओर बड़ी संख्या में नागरिक बाल स्वयंसेवकों को देखने और स्वागत करने के लिए खड़े थे।
जगह-जगह फूल वर्षा, जयकारों और तिलक लगाकर अभिनंदन की परंपरा के साथ नगरवासियों ने उनका स्वागत किया।
संचलन से पूर्व शाम 4 बजे कंवर कॉलोनी हनुमान मंदिर स्थित मैदान में सभी बाल स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ।
इस अवसर पर संघ के विभाग के अनुसूचित जाति कार्यप्रमुख शिवशंकर रोकड़े ने बौद्धिक देते हुए कहा कि —
“डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के दिन 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने खेल-खेल में बच्चों में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाई थी, और वही भावना आज भी हर स्वयंसेवक के मन में जीवित है।”
उन्होंने आगे कहा कि संघ आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन बन चुका है, और विदेशों में इसे हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से जाना जाता है।
📞 7772828778 | 7723024600
रोकड़े ने कहा —
“संघ में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र दोनों का निर्माण होता है। हमारे स्वयंसेवक अनुशासन, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं।”
उन्होंने गुरु गोविंद सिंह के बेटों फतेह सिंह और जोरावर सिंह के बलिदान का उल्लेख करते हुए बच्चों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
नगर में उमड़ा उत्साह और गर्व का वातावरण
कार्यक्रम में नगर कार्यवाह मोहित वर्मा सहित संघ के अन्य पदाधिकारी, स्वयंसेवक और नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
नगर में निकलने वाले इस बाल पथ संचलन का समाजसेवियों, संस्थाओं और संगठनों ने पुष्प वर्षा और अभिनंदन के साथ स्वागत किया।
पूरा नगर राष्ट्रप्रेम और अनुशासन के रंगों में रंग गया।












