द इंडिया स्पीक्स डेस्क
चेन्नई। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित उत्तर चेन्नई थर्मल पावर स्टेशन (एनोर) का निर्माण स्थल मंगलवार शाम को एक भयानक त्रासदी का गवाह बना। विकास की दौड़ में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते, निर्माणाधीन बिजली संयंत्र में एक बड़ा स्टील आर्च (मेहराब) गिरने से 9 प्रवासी मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं।
यह हादसा उस वक्त हुआ जब मजदूर लगभग 30 से 45 फीट की ऊंचाई पर कोयला हैंडलिंग बाड़े के पास काम कर रहे थे। अचानक, एक जोरदार आवाज़ के साथ विशाल स्टील का ढांचा भरभराकर नीचे आ गिरा और कई मजदूरों को मलबे में दबा दिया। चश्मदीदों के अनुसार, दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कई मजदूरों की जान घटनास्थल पर ही चली गई।
विकास के रास्ते में मौत का जाल: कौन जिम्मेदार?
मरने वाले सभी 9 मजदूर असम और आसपास के उत्तर-पूर्वी राज्यों से आए थे। वे बेहतर जीवन की तलाश में चेन्नई पहुंचे थे, लेकिन निर्माण कार्य में कथित लापरवाही और सुरक्षा चूक ने उनके जीवन का अंत कर दिया।
घटना के बाद, बचाव अभियान तुरंत शुरू किया गया। घायल मजदूरों को तुरंत चेन्नई के स्टेनली सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। दुर्घटना के सही कारणों की जांच के लिए पुलिस और बीएचईएल (BHEL) के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
मुआवजे का मरहम
इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन दोनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मुआवजे का ऐलान किया है:
- पीएम मोदी: मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि।
- सीएम स्टालिन: मृतकों के परिवारों को ₹10 लाख का मुआवजा, साथ ही शवों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने की व्यवस्था के निर्देश।
राज्य के मुख्यमंत्री ने बिजली मंत्री को घटनास्थल का दौरा करने और राहत कार्यों पर निगरानी रखने का भी निर्देश दिया है।
यह दुर्घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या देश में बड़े निर्माण परियोजनाओं में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जा रहा है? क्या विकास की गति इतनी तेज़ होनी चाहिए कि वह मानवीय जीवन की कीमत पर पूरी हो? द इंडिया स्पीक्स इस त्रासदी की गहन जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग करता है।












