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2006 के आबकारी परमिटों में रूट बदलने और EVC गायब होने से गहराया शक

खरगोन। The India Speaks Desk

मध्यप्रदेश की प्रमुख शराब कंपनी एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रेवरीज लिमिटेड, ग्राम खोड़ी, तहसील बड़वाह, जिला खरगोन द्वारा वर्ष 2006 में जारी किए गए दो एक्सपोर्ट परमिटों ने अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
दोनों परमिटों में गंतव्य दीमापुर (नगालैंड) बताया गया था, लेकिन अब सामने आए सबूतों से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि माल दीमापुर पहुंचा ही नहीं।


दो परमिट, दो अलग रूट — और एक बड़ा अंतर

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The India Speaks को शिकायतकर्ता सत्यनारायण शर्मा से दोनों परमिटों की प्रतियां प्राप्त हुई हैं।

1️⃣ पहला परमिट — क्रमांक 16/NL/05-06 दिनांक 06/02/2006
इसमें Royal Falcon Rum और Royal Falcon Whisky दीमापुर भेजने का उल्लेख है।
रूट लिखा है –

“बड़वाह → इंदौर → रतलाम → चित्तौड़गढ़ → जयपुर → गाजियाबाद → लखनऊ → गोरखपुर → सिलीगुड़ी → दीमापुर (नगालैंड)”

2️⃣ दूसरा परमिट — क्रमांक 9/NL/06/07 दिनांक 18/09/2006
इसमें Superman Rum और Superman Whisky दीमापुर भेजने का उल्लेख है।
रूट लिखा है –

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“बड़वाह → इंदौर → भोपाल → जबलपुर → सिंगरौली → पलटनगंज → सिलीगुड़ी → दीमापुर (नगालैंड)”

दोनों परमिटों में गंतव्य एक ही — दीमापुर — लेकिन रूट पूरी तरह अलग हैं।
पहला रूट गाजियाबाद होकर जाता है जबकि दूसरा सीधा पूर्वोत्तर की ओर।
यही फर्क अब शक की सबसे बड़ी वजह बन गया है।


सत्यनारायण शर्मा का दावा — “दोनों परमिट असली हैं और अब तक मेरे पास हैं”

शिकायतकर्ता सत्यनारायण शर्मा, जो उस समय कंपनी में कार्यरत थे, ने The India Speaks से बताया कि

“ये दोनों परमिट आज भी मेरे पास हैं।
इसका मतलब साफ है कि यह माल कभी दीमापुर पहुंचा ही नहीं।
क्योंकि अगर माल वहां गया होता, तो परमिट की एक प्रति दीमापुर आबकारी विभाग में जमा होती और दूसरी वापस EVC के रूप में खरगोन आबकारी को भेजी जाती।
लेकिन दोनों की मूल प्रतियां अब भी मेरे पास हैं।”

शर्मा का कहना है कि उन्हें यह नहीं पता कि माल कहां उतारा गया,
लेकिन यह निश्चित है कि दोनों खेपें बीच रास्ते में ही कहीं उतार दी गईं।


EVC रिकॉर्ड में नहीं — अब The India Speaks ने RTI दायर की

आबकारी नियमों के अनुसार, जब शराब की खेप गंतव्य पर पहुंचती है तो गंतव्य आबकारी विभाग EVC (Excise Verification Certificate) जारी करता है।
लेकिन इस मामले में अब तक दीमापुर आबकारी से कोई EVC रिकॉर्ड नहीं मिला है।

इस तथ्य की पुष्टि के लिए The India Speaks ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत
खरगोन आबकारी विभाग से औपचारिक जानकारी मांगी है कि
क्या इन दोनों परमिटों की EVC रिपोर्ट रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं।

जैसे ही RTI का जवाब प्राप्त होगा, The India Speaks उस रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करेगा।


अब उठते हैं कई गंभीर सवाल

  1. जब गंतव्य दीमापुर था, तो दो अलग-अलग रूट क्यों बनाए गए?
  2. क्या माल को जानबूझकर गाजियाबाद या अन्य जगहों पर उतारा गया?
  3. आबकारी विभाग ने उस समय इस अंतर पर ध्यान क्यों नहीं दिया?
  4. और अगर दोनों मूल परमिट आज भी शिकायतकर्ता के पास हैं, तो EVC जारी कैसे हुई?

The India Speaks की पड़ताल जारी

The India Speaks के पास अब दोनों परमिटों की मूल प्रतियां सुरक्षित हैं,
जो स्वयं सत्यनारायण शर्मा ने भेजी हैं।
जांच की दिशा में अगला कदम RTI के जवाब के बाद तय होगा।
रिपोर्ट की अगली कड़ी में हम EVC रिकॉर्ड और परमिट सत्यापन रिपोर्ट प्रकाशित करेंगे।

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