गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी शताब्दी पर करनाल में भव्य गुरमत समागम आयोजित
करनाल। The India Speaks Desk
करनाल स्थित डेरा कार सेवा में आयोजित विशाल गुरमत समागम में फतेहगढ़ साहिब से आए ज्ञानी हरपाल सिंह ने अपने प्रभावी प्रवचन में कहा कि “एक राष्ट्र में एक ही धर्म और एक ही भाषा की बात करना औरंगजेबी सोच थी, क्योंकि वह केवल एक धर्म को थोपना चाहता था। जबकि परमात्मा विविधता को पसंद करते हैं—अगर ईश्वर भी उसी सोच के होते तो संसार में एक जैसे फूल, एक जैसे मनुष्य और एक जैसी प्रकृति ही दिखाई देती।”
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने इसी जबरन एकरूपता और दमनकारी विचारधारा का विरोध करते हुए सभी को अपने-अपने धर्म को मानने की स्वतंत्रता देने के लिए अपनी शहादत दी। यह शहादत विश्व मानवता को स्वतंत्रता, सह-अस्तित्व और विविधता का संदेश देती है।
कथा, कीर्तन और ऐतिहासिक विरासत के दिव्य दर्शन
एक ओंकार मीडिया द्वारा बाबा सुखा सिंह के सहयोग से आयोजित इस समागम में संगत को गुरु तेग बहादुर जी की संपूर्ण बानी के अखंड कीर्तन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
करनाल की संगत ने गुरु गोबिंद सिंह जी की दुर्लभ निशानियों—प्राचीन हुकमनामे, बँसावली नामा और गुरु काल का विशेष “चंदोआ”—के दर्शन भी किए।
“गुरु तेग बहादुर जी की शहादत सिर्फ धर्म की रक्षा नहीं बल्कि मानव की स्वतंत्रता और विविधता की रक्षा का प्रतीक है।” — ज्ञानी हरपाल सिंह
भाई मति दास, सती दास और भाई परागा की वंशावली ने साझा किया गौरवशाली इतिहास
कार्यक्रम में भाई मति दास, भाई सती दास की नौवीं पीढ़ी और महान शहीद भाई परागा की तेरहवीं पीढ़ी से भाई चरणजीत सिंह ने विरासत से जुड़े विविध ऐतिहासिक दस्तावेजों और निशानियों का परिचय कराया।
उन्होंने प्राचीन अकाल बूंगा (वर्तमान श्री अकाल तख्त साहिब) से जारी मूल हुक्मनामे, गुरु हर राय साहिब जी के समय से जुड़े बँसावली नामे और ऐतिहासिक चंदोआ के बारे में भी विस्तार से बताया।
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इक ओंकार मीडिया के प्रबंध निदेशक एवं इंटरनेशनल सिख फोरम के महासचिव प्रीतपाल सिंह पन्नू ने बताया कि कीर्तन सुबह 8 बजे आरंभ होकर रात 10 बजे तक चला।
इस दौरान गुरु तेग बहादुर जी द्वारा रचित 15 रागों के 59 शब्द, 57 श्लोक और संपूर्ण बानी की सार रूप में कथा की प्रस्तुति हुई।
श्री दरबार साहिब अमृतसर के हजूरी रागी भाई भूपिंदर सिंह, भाई जबरतोड़ सिंह, भाई गुरदेव सिंह (ऑस्ट्रेलिया), और भाई जगमोहन सिंह (पटियाला) ने अपनी सेवाओं से संगत को निहाल किया।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
समागम में विशेष रूप से उपस्थित रहे:
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झिंडा
चरडी कला टाइम टीवी के चेयरमैन पद्मश्री जगजीत सिंह दर्दी
पंजाब भवन सरी (कनाडा) के प्रधान सुखी बाठ
इंग्लैंड सुप्रीम कोर्ट के सॉलिसिटर एवं इतिहासकार प्रो. भूपिंदर सिंह
किसान नेता गुरनाम सिंह चाड़ुनी
एवं कई अन्य गणमान्य सदस्य
कार्यक्रम का मंच संचालन दर्शन सिंह नेवल ने किया।
डेरा कार सेवा के गुरसेवक सिंह ने बताया कि बाबा सुखा सिंह की अगुवाई में लंगर सेवा पूरे दिन अटूट चली।
समागम के सफल आयोजन में दशमेश अखाड़ा, गुरु नानक सेवक जत्था, भाई घनैया जी सुखमनी साहिब सोसाइटी, नौजवान सिंह सभा, सिख मिशनरी कॉलेज, नौजवान सिख सेवा दल और अनूप किताब घर का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर चित्र प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र
गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश से लेकर शहादत तक के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाती विशेष चित्र प्रदर्शनी इस समागम का मुख्य आकर्षण रही।
इसे एक ओंकार मीडिया द्वारा श्री सहज पाठ सेवा लहर के सहयोग से तैयार किया गया था।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रदर्शनी को देखने उमड़ी।
प्रीतपाल सिंह पन्नू ने बताया कि यह प्रदर्शनी अब विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में भी लगाई जाएगी ताकि युवा पीढ़ी गुरु साहिब के महान जीवन से प्रेरणा ले सके।












