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RTI अस्वीकृति पर आयोग ने मांगा जवाब, पारदर्शिता बहस तेज

भोपाल। The India Speaks Desk

मध्यप्रदेश में Project Cheetah से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और निर्णयों को लेकर सूचना अधिकार कानून (RTI) के तहत उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सूचना आयोग (State Information Commission, Madhya Pradesh) ने फॉरेस्ट विभाग द्वारा जानकारी देने से इनकार करने पर विभाग को औपचारिक नोटिस जारी किया है। विभाग को 12 दिसंबर तक विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।

फॉरेस्ट विभाग ने RTI को खारिज करते हुए RTI Act की धारा 8(1)(a) — “राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नियंत्रण संबंधी अपवाद” — का हवाला दिया था। लेकिन आयोग ने इस आधार को “पर्याप्त न बताते हुए” विभाग से स्पष्ट कारण और दस्तावेजी स्पष्टीकरण मांगा है।


RTI अस्वीकृति पर आयोग की सख्त टिप्पणी

आयोग के अनुसार, “Project Cheetah” के तहत होने वाले निर्णय, मृत्यु रिपोर्ट, निगरानी व्यवस्थाएँ और प्रबंधन से जुड़ी सूचनाएँ सामान्य तौर पर जनहित से संबंधित होती हैं। ऐसे में सुरक्षा संबंधी अपवाद का सीधा और व्यापक उपयोग औचित्यहीन माना जा सकता है।

“सूचना अस्वीकृति के लिए दिए गए कारण प्रथमदृष्टया पर्याप्त नहीं पाए गए हैं। विभाग 12 दिसंबर तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करे।”
— नोटिस में आयोग की टिप्पणी


जनस्वार्थ, शोध और आंदोलन के लिए क्यों अहम है यह मामला

शहडोल, शिवपुरी और कूनो सहित प्रदेश के विभिन्न अभयारण्यों में चीता मृत्यु, स्वास्थ्य निगरानी, रेडियो-कॉलरिंग और सुरक्षा ढांचे पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई पर्यावरणविद, नागरिक समूह और RTI कार्यकर्ता यह दावा करते रहे हैं कि

परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं की जा रहीं

मृत्यु और निगरानी से जुड़ी फाइलों तक पहुंच सीमित है

प्रोजेक्ट के खर्च, ट्रेनिंग और तकनीकी साझेदारियों पर पारदर्शिता की कमी है

सूचना आयोग का यह कदम इन सभी सवालों को औपचारिक जांच के दायरे में ले जाता है।


12 दिसंबर की सुनवाई क्यों हो सकती है महत्वपूर्ण

12 दिसंबर को होने वाली अगली कार्यवाही में फॉरेस्ट विभाग को—

RTI अस्वीकृति के कारण

सुरक्षा अपवाद लागू करने के आधार

उपलब्ध दस्तावेजों की सूची

कौन सी सूचनाएँ रोकी गईं और क्यों

—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट स्पष्टीकरण देना होगा। यदि विभाग जवाब देने में विफल रहता है, तो आयोग आगे दंडात्मक कार्रवाई या सूचना जारी करने का आदेश भी दे सकता है।


चीता परियोजना पर गंभीर बहस की शुरुआत?

इस नोटिस ने राज्य में Project Cheetah की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि—

पारदर्शिता बढ़ेगी

वैज्ञानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होगी

परियोजना के वास्तविक प्रभाव और चुनौतियाँ सामने आएँगी

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